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भारत के कपास निर्यात पर कीटों का दंश!

रॉयटर्स | वर्धा Nov 26, 2017 09:47 PM IST

भारत का कपास निर्यात पिछले अनुमान की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम रहने की आशंका है। उद्योग के अधिकारियों ने रॉयटर्स से कहा कि पिंक बॉलवार्म दक्षिणी एशियाई देश का उत्पादन नष्टï करने को उतारू है, जिससे रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद की जा रही थी। विश्व के सबसे बड़े उत्पादक की ओर से निर्यात में कमी के कारण अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे इसके प्रतिस्पर्धियों को पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश जैसे एशियाई खरीदारों को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। अग्रणी कपास निर्यातक खिमजी विश्राम ऐंड संस के एक साझेदार नयन मिरानी ने कहा कि इस साल निर्यात योग्य अधिशेष लगभग 60 लाख गांठ (एक गांठ का वजन 170 किलोग्राम) होगा। कीटों के हमले की वजह से उत्पादन अनुमानों को संशोधित किया गया है। इससे पहले उद्योग के अधिकारी 75 लाख गांठों के निर्यात का अनुमान जता रहे थे। कपास के बुआई क्षेत्र में 19 प्रतिशत की उछाल ने उद्योग के अधिकारियों को 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2017-2018 के सीजन में चार करोड़ गांठों के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए प्रोत्साहित किया था। लेकिन जब किसानों ने कटाई शुरू की तो उन्होंने पाया कि खेत इन कीटों से ग्रस्त थे जो कपास के रेशों और पौधों के डोडे या फल में बीजों को खा जाते हैं। यह परेशानी खासतौर पर भारत के पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में व्याप्त थी, जो देश का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है।

 
जयदीप कॉटन फाइबर्स प्रा. लि. के मुख्य कार्यकारी चिराग पटेल ने कहा कि कई क्षेत्रों में इस कीट का हमला बहुत गंभीर था। अब हमें लगता है कि उत्पादन 3.75 करोड़ गांठ के आस-पास रहेगा। भारतीय किसानों द्वारा बीटी कपास के रूप में पहचाने जाने वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज को अपनाए जाने के बावजूद इस कीट का संक्रमण हुआ है। ये बीज कीट प्रतिरोधी होते हैं। सरकार ने 2006 में इस बीज को मंजूरी दी थी। केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के निदेशक वीएन वाघमारे ने कहा कि इस तकनीक ने भारत को विश्व के दूसरे सबसे बड़े फाइबर निर्यातक के रूप में परिवर्तित कर दिया था। हालांकि अब यह कीट इस प्रौद्योगिकी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकास कर रहे हैं। किसान पांडुरंग काले ने कीट दिखाने के लिए उसके खाए हुए कपास के डोडे को खोलकर दिखाते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती फसल की वजह से मैं पांच टन कपास उत्पादन की उम्मीद कर रहा था। लेकिन डोडे खुले ही नहीं क्योंकि करीब-करीब सभी डोडे कीट से संक्रमित हैं। काले ने अपनी फसल पर 1,50,000 रुपये खर्च किए थे, लेकिन बीटी बीजों के प्रयोग के बावजूद कीटों ने उनके पांच एकड़ के खेत से एक किलोग्राम कपास उत्पादन भी नहीं छोड़ा।
कीवर्ड cotton, कपास बुआई,

  
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