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जहाजी मालभाड़े के साथ बढ़ रहे जिंसों के दाम

राजेश भयानी और अदिति दिवेकर | मुंबई Nov 26, 2017 09:47 PM IST

जहाजरानी उद्योग के मालभाड़ा बाजार के साथ ही जिंसों की कीमतों में भी तेजी आ रही है। भारत, चीन, अटलांटिक क्षेत्र, और खाड़ी में अच्छी आयात मांग के चलते पिछले कुछ महीनों से बाल्टिक ड्राई बल्क, टैंकर सेगमेंट और अन्य मालभाड़ा सूचकांकों में बढ़ोतरी हो रही है।  बाल्टिक ड्राई बल्क सूचकांक पिछले कुछ सप्ताह में मामूली गिरावट के बावजूद इस साल अब तक 45.3 फीसदी चढ़ चुका है और तीन साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। ओपेक के उत्पादन में कटौती के आसार और क्षेत्र में भू-राजनैतिक अनिश्चितताओं के कारण ब्रेंट ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कच्चे तेल में हलचल को प्रदर्शित करने वाला बाल्टिक ड्राई टैंकर सूचकांक पिछले तीन महीनों में 33 फीसदी चढ़ चुका है। इतनी ही बढ़ोतरी एसऐंडपी प्लैट्स जहाजरानी मालभाड़ा सूचकांकों में दर्ज की गई है, जो भारतीय बंदरगाहों को जोडऩे वाले मार्गों को प्रदर्शित करते हैं। 
 
पिछले दो सप्ताहों के दौरान सूचकांक थोड़े नीचे आए हैं, लेकिन मालभाड़ा एजेंटों, विश्लेषकों और जहाजरानी कंपनियों का कहना है कि जहाजरानी मालभाड़ा बाजार में आगे मजबूती का रुझान बने रहने के आसार हैं। क्या इससे जहाजरानी कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी? यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी जहाज कंपनियां अच्छी मालभाड़ा दरों को भुनाने की स्थिति में हैं। 
 
इसके बावजूद भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड के एक अधिकारी ने कहा, 'बहुत सी कंपनियों के मार्जिन में सुधार आया है, लेकिन यह बहुत अधिक नहीं है और जहाजरानी कंपनियां अब भी मुनाफे में नहीं आई हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में काफी अस्थिरता और उतार-चढ़ाव है।' पिछले दो सप्ताहों में जहाजरानी मालभाड़े में मामूली गिरावट आई है, लेकिन रुझान मजबूत रहेगा।
 
एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स के वरिष्ठ प्रबंध संपादक (एशिया प्रशांत जहाजरानी एवं मालभाड़ा) प्रदीप राजन ने कहा, 'सितंबर और अक्टूबर में ड्राई बल्क की मालभाड़ा दरों में बढ़ोतरी हुई है। ये एशिया प्रशांत क्षेत्र में चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही से ही बढ़ रही हैं। इसकी वजह यह है कि चीन और भारत में कोयले की मांग निकल रही है, जिसकी वजह यह है कि भारतीय बिजली संयंत्रों के पास कोयले का भंडार काफी कम है और इसी वजह से पैनामैक्स और सुपरमैक्स श्रेणी के जहाजों का उपयोग बढ़ा है।'
 
बिजली संयंत्रों पर केयर रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश कोयले की किल्लत से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं।'  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटलांटिक बाजार विशेष रूप से पूर्वी तटीय दक्षिण अमेरिका और अमेरिकी खाड़ी तट के क्षेत्रों में अनाज के बड़े बाजार से वहां जहाजों की तगड़ी मांग के कारण एशिया प्रशांत बाजार से जहाज पश्चिमी गोलाद्र्ध में गए हैं। इससे एशिया प्रशांत क्षेत्र में जहाजों की उपलब्धता कम हुई है। इस तरह ड्राई बल्क खंड के एक तरफ के जहाजों की मांग रही है। पिछले दो सप्ताह में मालभाड़े में कुछ गिरावट की वजह एटलांटिक क्षेत्र के अनाज बाजार में सुस्ती आना है। 
 
राजन ने कहा, 'भारत में कोयले की मांग के अलावा इस्पात, लौह अयस्क, पेलेट आदि के बढ़ते भारतीय निर्यात से सुपरमैक्स श्रेणी के जहाजों की अच्छी मांग आ रही है।' हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मालभाड़े की दरों में बढ़ोतरी थम गई है। 
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