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जीएसटी: सीमेंट कंपनियां निराश

चंदन किशोर कांत | मुंबई Nov 27, 2017 10:04 PM IST

सीमेंट कंपनियों को आस

सीमेंट कंपनियों का मानना था कि प्रमुख निर्माण सामग्री होने के कारण सीमेंट को जीएसटी कर में राहत दी जाएगी
कंपनियां लंबे समय से कर रहीं इसे व्यावहारिक बनाने की मांग

सीमेंट पर जीएसटी की दर नहीं घटाए जाने पर उद्योग ने निराशा जताई है। देश में प्रति वर्ष 46 करोड़ टन सीमेंट का उत्पादन होता है और सीमेंट कंपनियां उम्मीद कर रही थीं कि दूसरी निर्माण सामग्री की तरह सीमेंट को भी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की श्रेणी में रखा जाएगा। लेकिन जीएसटी परिषद की हाल में हुई बैठक में इस संबंध में कोई बदलाव नहीं किया गया।

सीमेंट क्षेत्र उम्मीद कर रहा था कि बुनियादी ढांचे के विकास और किफायती आवास पर जोर दे रही सरकार सीमेंट पर जीएसटी की दर को कम करेगी। सीमेंट कंपनियों का मानना था कि बुनियादी ढांचा सरकार की विकास नीति की धुरी है और प्रमुख निर्माण सामग्री होने के कारण सीमेंट को कर में राहत दी जाएगी। अलबत्ता एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन जैसे लक्जरी सामान की तरह सीमेंट को उच्च कर श्रेणी में रखा गया है। सीमेंट कंपनियों की संस्था सीमेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) ने सरकार के इस फैसले को उद्योग के लिए निराशाजनक बताया है। 

सीएमए के अध्यक्ष शैलेंद्र चौकसे ने कहा कि सबके लिए आवास, स्वच्छ भारत और दूसरी बुनियादी परियोजनाओं के केंद्र में सीमेंट है लेकिन सरकार का इस पर जीएसटी की दर नहीं घटाने का फैसला निराशाजनक है। उल्लेखनीय है कि सीमेंट को हमेशा से ही उच्च कर श्रेणी में रखा जाता रहा है। सीमेंट कंपनियां लंबे समय से इसे व्यावहारिक बनाने की मांग कर रही हैं लेकिन उसकी मांग को सरकार ने कभी स्वीकार नहीं किया। सघन पूंजी और सघन श्रमिक उद्योग होने के कारण सीमेंट देश के खजाने में अहम योगदान देता रहा है।

उद्योग के जानकारों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि सरकार के फैसले से उन्हें भारी निराशा हुई है। जब कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरों में संशोधन किया गया तो फिर सीमेंट पर विचार क्यों नहीं किया गया। दक्षिण भारत की एक बड़ी सीमेंट कंपनी के एक कार्यकारी उपाध्यक्ष ने कहा कि सीमेंट को उच्च कर श्रेणी में रखना उसके साथ अन्याय है। किसी जिंस को लक्जरी सामान के साथ कैसे रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब भी अगली बार कर ढांचे में बदलाव होगा, तो सीमेंट उद्योग फिर सरकार के समक्ष अपनी मांग रखेगा।

श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक एच एम बांगड़ ने कहा, 'मुझे नहीं लगता है कि सीमेंट को उसी श्रेणी में बनाए रखने का उद्योग पर कोई असर होगा। जब एक जुलाई से जीएसटी लागू किया गया तो हम मानसिक रूप से 28 फीसदी के लिए तैयार थे। 18 फीसदी का सकारात्मक असर होता, आखिर कौन कम कर नहीं देना चाहता है।'

सीमेंट क्षेत्र के अधिकारियों का कहना है कि यह एक काल्पनिक प्रभाव है लेकिन दक्षिण भारतीय कंपनी के अधिकारी ने कहा कि उद्योग के पास भारी कर चुकाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। सीएमए के मुताबिक सीमेंट उद्योग रोजगार सृजन और जीडीपी वृद्धि में उल्लेखनीय योगदान कर सकता है। सीमेंट पर कर की दर को व्यावहारिक बनाने से न केवल उद्योग संकट के मौजूदा दौर से बाहर निकलेगा बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की सरकार की मंशा के बारे में भी अच्छे संकेत मिलते।
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