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ब्रांडेड वस्त्र कंपनियों पर असर जारी

दिलीप कुमार झा और राघवेंद्र कामत | मुंबई Nov 29, 2017 09:40 PM IST

ब्रांडेड वस्त्र निर्माता और खुदरा विक्रेता जुलाई से लागू कर सुधारों यानी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के असर से अब तक भी उबर नहीं पाए हैं। इन कर सुधारों का सीधा असर हुआ था, क्योंकि जीएसटी के बाद बोझ पडऩे से पूरी वस्त्र शृंखला अनिश्चित स्थिति में थी। बाद में उपभोक्ताओं के रुझान पर भी असर पड़ा और निर्यात में गिरावट से हालात बद से बदतर हो गए। 
 
बड़े भागीदारों के सितंबर तिमाही केपरिणामों ने इसे दर्शाया है और विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इनके लिए अच्छे दिन अब भी दूर हैं। 1,000 रुपये से ऊपर की कीमत वाले ब्रांडेड वस्त्रों पर 12 प्रतिशत का जीएसटी लगता है और इस सीमा से नीचे वाले वस्त्रों पर पांच प्रतिशत। इस कर की वजह से खुदरा विक्रेताओं ने उपभोक्ताओं को कम कीमत वाले वस्त्रों की ओर रुख करते देखा। स्थापित कंपनियों को  इस नई कर व्यवस्था का पालन करना था और वे कर से बचने के लिए नकदी में सौदे नहीं करतीं हैं।
 
क्लॉदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि उपभोक्ताओं के कमजोर रुख, निर्यात में तेज गिरावट और कई कंपनियों में नकदी की कमी के परिणाम स्वरूप कुछ और महीनों तक ब्रांडेड वस्त्र निर्माता कंपनियां पर दबाव बने रहने की संभावना है। उन्हें लग रहा है कि इन कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 18 बेकार हो गया है। अक्टूबर में निर्यात 41 प्रतिशत गिरा है और शुल्क संबंधी खामियों का लाभ खत्म होने के कारण जीएसटी के बाद भी यही प्रवृत्ति नजर आई है तथा रुपये का मूल्य कुछ कम होने से भी मदद नहीं मिली है। मेहता के मुताबिक, दीवाली और पूरे त्योहारी सीजन से भी ज्यादा मदद नहीं मिली है।
 
ब्रांडेड वस्त्रों की कंपनियों के जुलाई-सितंबर के वित्तीय परिणामों पर इसका असर दिखा है। ब्रांडेड वस्त्रों की कंपनियों का कारोबार और शुद्ध लाभ - दोनों दबाव में रहे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषक करुपल मनियार ने कहा कि ऊंची जीएसटी दरों की वजह से मजबूत तिमाही में ब्रांडेड वस्त्र और खुदरा कंपनियां से सामान्य राजस्व वृद्धि की तुलना में कम की अपेक्षा की जा रही है, जबकि जीएसटी के कारण ब्रांडेड वस्त्र कंपनियों का मुनाफा स्टॉक की पुरानी लागत से प्रभावित होने की आशंका है। 
 
हम 3-4 साल की अवधि में निवेश की सलाह देते हैं क्योंकि कंपनियां वितरण नेटवर्क का विस्तार करके और मुनाफा, नकदी प्रवाह तथा रिटर्न अनुपात में सुधार करके पैमाना हासिल करती हैं। यहां आदित्य बिड़ला फैशन ऐंड रिटेल (एबीएफआरएल) का उदाहरण दिया जा सकता है जिसकी दूसरी तिमाही भी कमजोर रही है। जीएसटी लागू होने के प्रभाव, पुरानी कर व्यवस्था से नई में प्रवेश करने के दौरान आने वाले मसलों और खासतौर पर जुलाई में उपभोक्ताओं के कमजोर रुख की वजह से ऐसा हुआ है। हालांकि मध्यम अवधि में जीएसटी के सकारात्मक होने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन जून में सीजन की बिक्री के अंत में और उसके बाद जुलाई में ग्राहकों की संख्या में गिरावट आई है।
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