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एनसीडीईएक्स पर कृषि विकल्प कारोबार की शुरुआत

सुशील मिश्र | मुंबई Dec 01, 2017 09:52 PM IST

नैशनल ई-रिपॉजिटरी लिमिटेड (एनईआरएल) ने गोदामों की इलेक्ट्रॉनिक रसीदों के लिए रिपॉजिटरी सेवा (कमोडिटी ऑप्शंस) शुरू की है। यह कमोडिटी हेजिंग का नया तरीका है जिससे हेंजिग और आसान होगी। माना जा रहा है इसका सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। एनईआरएल प्रमुख कृषि जिंस एक्सचेंज एनसीडीईएक्स की सहायक कंपनी है।  कमोडिटी ऑप्शंस एक ऐसा करार है जो खरीदार को यह अधिकार देता है जिसमें जरूरी नहीं कि किसी भी दाम पर या तय समय से पहले वह खरीदने या बेचने का फैसला ले। इससे किसानों को फायदा हो सकता है जिससे उनको पहले तय मूल्य पर बेचने का मौका मिलता है। एनसीडीईएक्स के मुताबिक गुजरात और राजस्थान में ग्वार गम और तिल के बीच में वस्तुओं के लिए ई-एनडब्ल्यूआर (सौदा प्रमाण पत्र) जारी किये जाते हैं। इनके इस्तेमाल से सभी संबद्ध पक्षकारों को फायदा होगा। एनसीडीईएक्स के करीब 300 गोदामों में 1,700-1,800 करोड़ रुपये मूल्य के कृषि जिंसों का स्टॉक है। 
 
एनसीडीईएक्स के अधिकृत गोदामों में जमा कृषि जिंसों का ई-रसीद के आधार पर कारोबार किया जा सकता है। एनईआरएल के मुख्य कार्याधिकारी केदार देशपांडे के मुताबिक यह एक छोटी शुरुआत है, यह जमाकर्ताओं को ईएनडब्ल्यूआर में माल स्वीकार करने की इजाजत देता है जिससे ई- रिपॉजिटरी में अपना खाता खोलने के लिए रिपोजिटरी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया जा सके। 
 
एनईआरएल का जो उद्देश्य है उसकी तरफ यह एक कदम है। हमारा उद्देश्य वित्तीय संपत्तियों में बदलने, वित्तीय तरलता में सुधार करना, वित्तपोषण की लागत को कम करना और बेहतर कीमत जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करना है। एनसीडीईएक्स पर ग्वार में ऑप्शंस कृषि जिंसों में कारोबार का नया विकल्प है। यह एनसीडीईएक्स पर सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली कृषि जिंस है। वायदा में रोजाना करीब 400-600 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ग्वार गम का सालाना करीब 4,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 85 फीसदी की है। जिंस बाजार में उठापटक मौसम में बदलाव, मांग और आपूर्ति के आधार पर होता है। वैश्विक हालात और नीतिगत बदलाव जिंस बाजार को प्रभावित करते हैं जिससे किसानों और कारोबारियों को कई बार भारी नुकसान उठाना पड़ता है। 
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