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तेल पर भारी रहेगी पहली छमाही

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Dec 03, 2017 09:46 PM IST

तेल की कीमतों पर 2018 की पहली छमाही के दौरान कुछ दबाव रहने की संभावना है। ओपेक के प्रमुख मंत्रियों द्वारा अगले साल के अंत तक कच्चे तेल उत्पादन में कटौती की प्राथमिकता व्यक्त किए जाने के बाद कच्चे तेल के दामों में इजाफा हुआ है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर बेंचमार्क यूएस क्रूड का वायदा 0.89 प्रतिशत बढ़कर 58.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया। अंतरराष्टï्रीय कीमतों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 0.20 प्रतिशत बढ़कर 63.70 डॉलर हो गया। 

 
हालांकि ब्रेंट की ऊंची कीमतों की वजह से अमेरिकी डब्ल्यूटीआई की मांग में तेजी आने के बाद डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट तेल के बीच का अंतर कुछ कम हुआ है। हालांकि तेल में सुधार हुआ है, लेकिन यह तांबे और जस्ते जैसी कुछ धातुओं के विपरीत पिछले दशक के उच्चतम स्तर से नीचे ही है। तेल आपूर्ति में नियंत्रण और मांग में स्थिरता के बावजूद ऐसा हुआ है। स्टॉक के निम्र स्तर से हाजिर कीमतों में भी कुछ इजाफे की संभावना है।
 
वैश्विक एजेंसी एसऐंडपी ग्लोबल ने कहा कि इस पर यूएस शेल ने भी अपना ध्यान केंद्रित किया है। ओपेक द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण आई तेजी को भुनाने के लिए यूएस शेल तेल के उत्पादकों ने उत्पादन बढ़ाया है। हालांकि, शेल तेल क्षेत्रों के मौजूदा प्रवर्तकों ने कंपनियों को अधिक उत्पादन से बचने को कहा है। इस वजह से आगे बाजार की दिशा के लिए यह महत्त्वपूर्ण रहेगा कि ओपेक के फैसले पर उनकी कैसी प्रतिक्रिया रहेगी। निर्यात ऑर्बिट्रेज में प्रतिस्पर्धा के लिए लिए एसऐंडपी प्लैट्स को भी ब्रेंट तेल के मुकाबले डब्ल्यूटीआई के दामों में करीब चार डॉलर प्रति बैरल कमी की संभावना लग रही है।
 
एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्स में विश्लेषण प्रमुख क्रिस मिडग्ले ने कहा कि नए बुनियादी ढांचे के निर्माण, मजबूत मांग और कच्चे तेल तथा उत्पादों के अधिक निर्यात की वजह से आम धारणा के मुकाबले सामान्य स्टॉक कम है। उन्होंने कहा कि हालांकि 2018 की पहली छमाही में सीजन की कमजोर मांग और स्टॉक निर्माण से कीमतों पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष की दूसरी छमाही में उत्तरी गोलार्ध की ग्रीष्म मांग से ब्रेंट की कीमतों को अधिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
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