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टायर विनिर्माता करेंगे 35,000 करोड़ का निवेश

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई Dec 03, 2017 09:47 PM IST

क्षमता उपयोग के 80 फीसदी स्तर पर पहुंचने के बाद टायर विनिर्माता क्षमता विस्तार के लिए ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में 35,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। विनिर्माताओं को इस साल की एक  अंक की वृद्धि के मुकाबले वित्त वर्ष 2019 में घरेलू और निर्यात मांग की वजह से दो अंकों में वृद्धि होने की भी उम्मीद है। पिछले साल इस दौरान टायर उद्योग का क्षमता उपयोग 65-70 प्रतिशत था। टायर खंड में केवल ऑटोमोबाइल उद्योग की वृद्धि से ही मदद नहीं मिली है। करीब 90 प्रतिशत टायर विनिर्माताओं के प्रतिनिधित्व का दावा करने वाली ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटमा) के अध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा कि सरकार की नीतियों से भी इस वृद्धि को सहायता मिली है।

 
इन नीतियों से उद्योग को किस प्रकार फायदा हुआ इसके कुछेक उदाहरण देते हुए शर्मा ने कहा कि नोटबंदी ने चीन के आयात (क्षमता उपयोग की एक सबसे बड़ी चुनौती) को कम कर दिया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने चीनी आयात पर और दबाव बना दिया, जो 50 प्रतिशत गिर गया। सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर को उच्च मूल्य वाले करेंसी नोटों को हटाने की घोषणा की थी और जीएसटी इस साल 1 जुलाई को लागू किया गया। 2016 में चीन ने भारत को प्रति माह 1,50,000 टायरों का निर्यात किया था। यह संख्या अब गिरकर 60,000 पर आ गई है। शर्मा ने कहा कि इस संख्या में आगे और गिरावट की संभावना है, क्योंकि भारतीय टायरों के दाम चीन वालों से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। अपोलो टायर्स के एशिया प्रशांत, पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के भी अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि टायर उद्योग ने वित्त वर्ष 2011 और 2016 के बीच करीब 25,000 करोड़ रुपये का निवेश किया। उनकी कंपनी अगले दो वित्त वर्षों में करीब 4,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। सिएट चेन्नई में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है और एमआरएफ की हर साल 800-1,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है, जो गुजरात में 4,000 करोड़ रुपये के निवेश के अतिरिक्त है।
 
शर्मा ने कहा कि उन्हें उद्योग के लिए वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही पहली के मुकाबले बेहतर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि दूसरे स्तर की टायर कंपनियों ने भी अच्छी मात्रा में वृद्धि की सूचना दी है। उद्योग का यह वर्ष उच्च एक अंक की वृद्धि के साथ समाप्त होगा। एटमा के लिए अनुसंधान कार्य करने वाली थॉट आर्बिट्रेज के निदेशक कौशिक दत्ता उम्मीद करते हैं कि 2015 से 2026 के बीच उद्योग का कुल कारोबार करीब चार गुना बढ़ जाएगा। घरेलू और निर्यात दोनों बाजार इसका अनुसरण करेंगे।
 
एटमा के महानिदेशक राजीव बुद्धिराजा के मुताबिक, मूल्य के रूप में 2017-18 के पहले छ: महीनों में टायर निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 162.096 करोड़ डॉलर हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह सात फीसदी था। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उन्हें इसके 20 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। टायर उद्योग ने दक्षेस, पश्चिम एशिया और आसियान देशों के अलावा अफ्रीका पर बड़ा दांव आजमाया है, जिस पर फिलहाल चीनी कंपनियों का वर्चस्व है। बुद्धिराजा ने कहा कि दामों के मामले में हम उनसे दूसरे स्थान पर हैं, लेकिन गुणवत्ता और तकनीक में हम आगे हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग को अफ्रीका और अन्य देशों में जाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार की सहायता की आवश्यकता होगी।
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