होम » Commodities
«वापस

तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचा चना

सुशील मिश्र | मुंबई Dec 13, 2017 10:20 PM IST

चने में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। चना वायदा में बिकवाली पर पांच फीसदी के स्पेशल मार्जिन के बावजूद गिरावट बरकरार है। वायदा बाजार में चने के दाम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे पहुंच गए हैं। रिकॉर्ड बुआई के कारण मंडियों में चना बेदम हो चुका है। हाजिर और वायदा बाजार में चने के दाम गिरकर 32 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। समर्थन मूल्य से कम दाम पर चना बिकने से सरकार पर भी दबाव बनने लगा है।

पिछले तीन महीने से चने में गिरावट का दौर चल रहा है। तीन महीने पहले 6,000 रुपये क्विंटल की दर से बिकने वाला चना हाजिर बाजार में गिरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे पहुंच गया है। इस सत्र के लिए चने का एमएसपी 4,200 रुपये क्विंटल तय किया गया है जबकि हाजिर बाजार में चने के दाम गिरकर 4,000 रुपये क्विंटल पहुंच चुके हैं। वायदा बाजार में तो और बुरा हाल है। एनसीडीईएक्स पर चना गिरकर चार हजार के नीचे 3,970 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है। यह 3,980 रुपये पर बंद हुआ। वायदा बाजार में इसके पहले 22 अप्रैल 2015 को चने का मूल्य 4,000 रुपये के नीचे (3,967 रुपये) था। कीमतों में गिरावट को रोकने के लिए एनसीडीईएक्स ने बिकवाली पर पांच फीसदी का स्पेशल मार्जिन लगाया है। बावजूद कीमतों में गिरावट जारी है।

कमोडिटी बाजार के जानकार अनिल अग्रवाल के मुताबिक चना अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है, लेकिन बुआई के आंकड़े और निर्यात किया गया स्टॉक जमा होने से अभी कीमतों में सुधार नहीं होने वाला है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल चने से दूर ही रहना चाहिए।

प्रमुख चना कारोबारी पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि चने सहित दूसरी दलहनों में गिरावट का दौर है। इस समय कृषि जिंस मंदी की गिरफ्त में है। बाजार में नकदी नहीं होने का असर कारोबार पर पड़ रहा है। देश में चने की रिकॉर्ड बुआई हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार भी चने की रिकॉर्ड पैदावार होगी। देश में पहले से भी दलहन का स्टॉक है। लिहाजा, कीमतों में गिरावट हो रही है। इंदौर सहित देश की कई मंडियों में चना न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे पहुंच चुका है और किसानों को एमएसमी के नीचे चना बेचना पड़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 4.78 लाख टन चने का आयात किया गया जो पिछले साल से 43 फीसदी अधिक है। इससे बाजार में पर्याप्त स्टॉक है और आगे बेहतर उत्पादन होने के आसार हैं। ऐसे में कीमत बढऩा मुश्किल है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 8 दिसंबर तक देशभर में 89.58 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हुई है, जो पिछले साल से 10.25 फीसदी अधिक है। पिछले साल 8 दिसंबर तक देश में 81.25 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हुई थी। रबी सीजन के दौरान चने का कुल अनुमानित रकबा 86.81 लाख हेक्टेयर है यानी बुआई अनुमानित रकबे से भी ज्यादा हो चुकी है। 

वर्ष 2015 में 74.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में चने की बुआई हुई थी जबकि वर्ष 2014 में रकबा 69.20 लाख हेक्टेयर, 2013 में 83.81 लाख हेक्टेयर और 2012 में 81.44 लाख हेक्टेयर था। चने की बुआई देश के सभी हिस्सों में अच्छी हुई है।  चना उत्पादक प्रमुख राज्य मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बुआई हुई है। मध्य प्रदेश में अब तक 31.24 लाख हेक्टेयर रकबे में बुआई हुई है। पिछले साल 26.67 लाख हेक्टेयर में हुई थी। मध्य प्रदेश में पिछले चार साल का रिकॉर्ड टूटा है। राज्य में चने का आरक्षित रकबा 30.40 लाख टन है जो पार कर चुका है। महाराष्ट्र में 14.25 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 13.25 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 13.95 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हुई है।

चने की रिकॉर्ड बुआई का कारण बेहतर मूल्य और फसल में कम पानी का उपयोग बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन के मुताबिक राज्य में अब तक करीब 90 फीसदी बुआई हो चुकी है। राज्य के अधिकतर जलाशयों में बेहद कम पानी है। ऐसे में किसानों को कम सिंचाई वाले चने की खेती का सुझाव दिया गया है। पानी कम होने की वजह से किसान गेहूं की जगह चने को तवज्जो दे रहे हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य भी बढ़ाकर 4,200 रुपये किंवंटल कर दिया है।
 
कीवर्ड commodity, prize, MSP, चना, एमएसपी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक