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कीट ने खाया महाराष्ट्र का कपास

दिलीप कुमार झा | मुंबई Dec 15, 2017 09:18 PM IST

महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में खड़ी फसलों पर गुलाबी कीट (पिंक बॉलवर्म) के हमले की वजह से राज्य में इस साल कपास किसानों को अपनी उपज में करीब 13 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कपड़ा मंत्रालय ने यवतमाल और जलगांव जिलों में फसल के भारी नुकसान के साथ महाराष्ट्र में औसत कपास उत्पादन में 13 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है। सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र का करीब एक-तिहाई कपास क्षेत्र गुलाबी कीटों के हमले से ग्रस्त है।

कपास किसानों ने फसल को हुए नुकसान पर अपनी चिंता जताई है और नुकसान की भरपाई के लिए बीज कंपनियों को अदालत में घसीटा है। कपास परामर्श बोर्ड के मुताबिक, महाराष्ट्र में 2017-18 के सीजन का कपास उत्पादन 344.21 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहेगा, जो पिछले साल के 395.92 किलोग्राम से कम है। बोर्ड का अनुमान है कि महाराष्ट्र में कपास का रकबा 42 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 38 लाख हेक्टेयर से 10.5 प्रतिशत अधिक है।

पिछले साल कपास की कीमतों में तेज इजाफे से प्रोत्साहित होकर अन्य स्थानों की तरह महाराष्ट्र में भी इस सीजन में किसानों ने सोयाबीन छोड़कर कपास का रुख कर लिया था। इसके परिणाम स्वरूप इस सीजन में कपास के रकबे में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। देश भर की 523.83 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की औसत उपज के साथ कपास परामर्श बोर्ड का अनुमान है कि इस सीजन का कुल कपास उत्पादन 3.770 करोड़ गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहेगा, जो कि पिछले साल के 3.450 करोड़ गांठ से अधिक है।

गुलाबी कीट ने महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक में कपास के खेतों पर हमला किया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कम पैदावार के बावजूद 2016-17 के तकरीबन 47.8 लाख गांठ के शेष स्टॉक से आपूर्ति की स्थिति सहज है। कपड़ा आयुक्त कविता गुप्ता ने कहा कि चूंकि पाकिस्तान ने भारतीय कपास को बाजार में आने की अनुमति दे दी है, इसलिए हमें 2017-18 में 67 लाख गांठों के निर्यात की उम्मीद है। भारतीय कपास के एक अन्य बड़े खरीदार चीन ने भी अपने कपास भंडारण में कमी की सूचना दी है।
 
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