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आलू किसान हुए बेहाल, चवन्नी में बिक रहा एक किलो माल

दिलीप कुमार झा | मुंबई Dec 22, 2017 09:45 PM IST

नया सीजन शुरू होते ही आलू किसानों की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। नई फसल के लिए कोल्ड स्टोरेज खाली करने के दबाव के बीच आलू के प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के स्टॉकिस्ट और गोदाम मालिकों को 20 से 25 पैसे प्रति किलोग्राम के भाव आलू बेचना पड़ रहा है। यही नहीं, किसान और स्टॉकिस्ट कोल्ड स्टोरेज से अपना माल निकाल नहीं रहे हैं क्योंकि गोदाम से निकालकर मंडी तक लाने में जितना खर्च लगता है, उससे काफी कम भाव पर आलू बिक रहा है। यही वजह है कि आगरा के कोल्ड स्टोरेज मालिक सड़कों पर आलू फेंक रहे हैं। काफी मात्रा में आलू को खेतों में भी डाला जा रहा है ताकि अगली फसल से पहले बतौर जैविक खाद उसका इस्तेमाल किया जा सके।
 
देश के दूसरे हिस्सों के आलू किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनकी उपज की कीमत उत्पादन लागत से भी कम हो गई है। कुछेक जगहों को छोड़ दें तो देश भर में आलू के दाम 4 से 5.50 रुपये प्रति किलो है, जबकि उसकी उत्पादन लागत 5 रुपये प्रति किलो के आसपास आती है। आगरा में आलू स्टॉकिस्ट विराज ट्रेडर्स के मालिक विशाल जैन ने कहा, 'किसानों और स्टॉकिस्टों के पास कोल्ड स्टोरेज से अपना समूचा आलू निकालने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है क्योंकि 15 फरवरी से आने वाली नई फसल के लिए कोल्ड स्टोरेज में जगह बनानी है। कोल्ड स्टोरेज की साफ-सफाई और मरम्मत आदि के लिए भी कम से कम 6 हफ्ते का समय चाहिए, इसलिए शीत गृहों के मालिक 31 दिसंबर से पहले पूरा स्टॉक खाली करना चाहते हैं।' 
 
बागवानी के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक विक्रय वर्ष 2016-17 (जून-जुलाई) में देश भर में कुल 4.82 करोड़ टन आलू की पैदावार होने का अनुमान है, जो पिछले साल के 4.34 करोड़ टन से 11 फीसदी ज्यादा है। देश में कुल आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान सर्वाधिक 31 फीसदी है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 23.29 फीसदी और बिहार 13.22 फीसदी आलू की पैदावार होती है। दिलचस्प है कि उत्तर प्रदेश में कुल आलू भंडारण की क्षमता 1.24 करोड़ टन है, जो कि राज्य के पैदावार के बराबर है। लेकिन कोल्ड स्टोरेज के मालिक आम तौर पर दिसंबर में समूचा गोदाम खाली करा लेते हैं। इस साल कोल्ड स्टोरेज के मालिकों ने आलू रखने वाले ग्राहकों को 31 अक्टूबर से पहले पूरा आलू निकाल लेने को कहा था, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया और फिर 15 दिसंबर तक की मोहलत दी गई। लेकिन आलू के दाम काफी नीचे रहने की वजह से किसान और स्टॉकिस्ट उसे लेने नहीं आ रहे हैं।
 
आगरा के आलू भंडारक शिव कुमार ऐंड संस के मालिक यदुवीर सिंह ने कहा, 'खाने योग्य ग्रेड से कम आकार (33 मिली मीटर गोलाई वाले) वाले आलू खराब होने लगे हैं। इसकी वजह से छोटे आकार के आलू की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है और आलू के खरीदार भी नहीं मिल रहे हैं।'  सिंह खुद आलू किसान हैं और उन्होंने सरकार से आलू वायदा कारोबार शुरू करने की अपील की है। सिंह ने कहा, 'सरकार ने आलू वायदा की अनुमति दी थी, लेकिन 2014 में उस पर रोक लगा दी गई। वायदा कारोबार आगे की कीमत का पता लगाने का अच्छा संकेतक है। कमोडिटी एक्सचेंज में जब इसका कारोबार होता था तब कीमतों में कभी इतना ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।'
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