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चने की ज्यादा बुआई से घटा गेहूं का रकबा

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Dec 24, 2017 09:50 PM IST

रबी सीजन में सबसे अधिक बुआई वाले अनाज गेहूं का रकबा 22 दिसंबर तक 262.7 लाख हेक्टेयर था जो पिछले वर्ष से लगभग दस लाख हेक्टेयर कम है। इसका प्रमुख कारण मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा चने की ओर रुख करना है। सामान्यत: रबी सीजन में 300-310 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की पैदावार होती है और इस बार अभी तक लगभग 88 प्रतिशत क्षेत्र पर ही इसकी बुआई हुई है। 
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कम क्षेत्रफल पर बुआई से भी 2017-18 में गेहूं के कुल उत्पादन में ज्यादा कमी नहीं आएगी क्योंकि इसकी पैदावार करने वाले अधिकतर राज्यों में मौसम अनुकूल बना हुआ है। वर्तमान रबी सीजन में दालों (जिसमें मुख्य रुप से चना शामिल है) का रकबा 22 दिसंबर तक लगभग 146 लाख हेक्टेयर था जो पिछले वर्ष के मुकाबले 9 प्रतिशत अधिक है।
 
चना देश में सबसे अधिक उत्पादित दालों में से एक है। इस बार चने की बुआई 99.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 14 प्रतिशत अधिक है। रबी सीजन में दालों के मामले में सबसे अधिक उत्पादन चना और मसूर का होता है और गुरुवार को केंद्र ने इन पर आयात शुल्क 30 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसकी प्रमुख वजह कटाई से ठीक पहले इनकी कीमत में 4,400 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी 5-10 प्रतिशत की गिरावट होना था।
 
इस बार चावल का बुआई क्षेत्रफल भी 10.3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 14.7 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि मोटे अनाज का बुआई रकबा 49.8 लाख हेक्टेयर से घटकर 49.4 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन के मामले में भी बुआई क्षेत्रफल 78.2 लाख हेक्टेयर से घटकर 73 लाख हेक्टेयर रह गया। इसकी प्रमुख वजह सरसों की कम बुआई रही।  भारत ने 2016-17 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 27.57 करोड़ टन आनाज का उत्पादन किया था। 
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