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हेजिंग व्यवस्था की राह तलाश रहीं चाय कंपनियां

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Dec 24, 2017 09:52 PM IST

वियतनाम में भारत से आने वाले भैंस के मांस पर नजर रखी जा रही है। भारतीय अधिकारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी करने में लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है। वियतनाम भारतीय भैंस के मांस का सबसे बड़ा बाजार है। भारत वहां हर साल 6.7 लाख टन भैंस के मांस का निर्यात करता है जिसकी कीमत 2 अरब डॉलर से अधिक है। भारत सालाना करीब 4 अरब डॉलर का भैंस का मांस निर्यात करता है। इस तरह इसमें वियतनाम की आधी भागीदारी है। 
 
वियतनाम के खाद्य सुरक्षा विभाग ने भारत से भैंस के मांस के निर्यात के लिए केवल 32 संयंत्रों को मान्यता दे रखी है। दूसरे प्रसंस्करण संयंत्रों ने पंजीकरण और मंजूरी के लिए आवेदन नहीं किया है। ऐसा पाया गया है जिन संयंत्रों ने वियतनाम के खाद्य सुरक्षा विभाग के पास पंजीकरण नहीं कराया है, वे भी वहां भैंस का मांस निर्यात कर रहे हैं। स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों में इस बात का जिक्र नहीं है कि यह मांस कहां भेजा जा रहा है और इसे किस अवधि के दौरान निर्यात किया जा सकता है। वियतनाम के अधिकारियों का कहना है कि यह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के खिलाफ है।
 
यही वजह है कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के महाप्रबंधक यू के वत्स ने भैंस के मांस का निर्यात करने वाली कंपनियों को एक नोटिस भेजकर कहा है कि यह देखने में आया है कि उन संयंत्रों को भी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं जो किसी खास देश के लिए खास अवधि के लिए पंजीकृत नहीं हैं। इसे देखते हुए एपीडा अपनी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है ताकि स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उसी देश के लिए जारी किया जाए जिसने मांस के आयात के लिए संयंत्रों को मंजूरी दी है। वत्स ने कहा कि भारतीय संयंत्रों को दिसंबर तक वियतनाम के विभाग के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस तारीख को किसी भी हालत में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
 
भारत से निर्यात होने वाले कृषि उत्पादों में भैंस का मांस बासमती चावल के बाद दूसरे स्थान पर है। देश से निर्यात होने वाले कृषि उत्पादों में बासमती की हिस्सेदारी 24.4 फीसदी है जबकि भैंस के मांस की हिस्सेदारी 21.4 फीसदी है। भारत से भैंस के मांस के निर्यात में मामूली गिरावट आई है। इस वित्त वर्ष के पहले छह महीने यानी अप्रैल से लेकर सितंबर के बीच भारत ने 621,318 टन भैंस के मांस का निर्यात किया जबकि पिछले वित्त वर्ष में इस अवधि के दौरान यह 629,723 टन था। अलबत्ता कीमत में संदर्भ में इसमें 1.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस साल पहले छह महीने में जहां भैंस के मांस के निर्यात से 1.87 अरब डॉलर की कमाई हुई जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में यह राशि 1.84 अरब डॉलर थी। 
 
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने कहा था कि कृषि उत्पादों के भारतीय निर्यातक आयात करने वाले देशों के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उप महानिदेशक राजबीर सिंह ने कहा, 'कृषि विभाग, सहकारी संघ और किसान कल्याण संघों ने नियमों के उल्लंघन के कई मामले हमारे सामने रखे हैं। आयात करने वाले देश भारतीय निर्यातकों के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। इससे देश की छवि खराब हो रही है और इससे दूसरे निर्यातकों के साथ-साथ देश का भी नुकसान हो सकता है।'
 
डीजीएफटी ने कृषि उत्पादों के सभी निर्यातकों को आयातक देश के नियमों का पालन करने को कहा है। उसने साथ ही चेतावनी दी है कि जो संयंत्र नियमों का पालन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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