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फिर लक्ष्य पार करेगा कृषि ऋण

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Dec 28, 2017 10:02 PM IST

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपये कृषि ऋण देने का लक्ष्य रखा है, जो इसके पार जा सकता है। वित्त वर्ष के पहले 6 महीने में ही करीब 6 लाख करोड़ रुपये कृषि ऋण दिया जा चुका है।  संसद में दिए गए एक बयान के मुताबिक 10 लाख करोड़ रुपये कर्ज वितरण के बजट लक्ष्य के मुकाबले 5.9 लाख करोड़ रुपये कर्ज पहले ही वितरित किया जा चुका है।  इससे यह भी संकेत मिलता है कि 2018-19 के बजट में सरकार कृषि ऋण का ज्यादा लक्ष्य तय कर सकती है, जैसा पिछले कुछ साल से लगातार किया जा रहा है। 
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने वित्त वर्ष 18 में करीब 10 लाख करोड़ रुपये कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से करीब 60 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। 2018-19 के बजट में कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाया जा सकता है।' 2016-17 में सरकार ने 9 लाख करोड़ रुपये कृषि ऋण देने का लक्ष्य रखा था, जबकि वास्तविक कृषि ऋण वितरण लक्ष्य का करीब 118.42 प्रतिशत यानी 10.65 लाख करोड़ रुपये रहा। इसी तरह से 2015-16 में सरकार ने 8.50 लाख करोड़ रुपये कृषि कर्ज का लक्ष्य रखा गया था, जबकि लक्ष्य का करीब 108 प्रतिशत कर्ज वितरित किया गया। 
 
पिछले कुछ साल से कृषि ऋण का वास्तविक वितरण लक्ष्य से ज्यादा रह रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि इसका लाभ छोटे और सीमांत किसानों को कितना हो रहा है।  टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस के आर रामकुमार और पल्लवी चव्हाण ने 2,000 से 2011 के बीच कृषि क्षेत्र को बैंकों द्वारा मिलने वाले कर्ज के बारे में अध्ययन किया। 'बैंक क्रेडिट टु एग्रीकल्चर इन इंडिया इन द 2000-2011 : डिसेक्टिंग द रिवाइवल' नाम से आई रिपोर्ट में पाया गया कि 2,00,000 रुपये से कम कर्ज पाने वालों की संख्या जहां 1990 में 92.2 प्रतिशत थी, यह संख्या 2,000 में घटकर 78 प्रतिशत और 2011 में 48 प्रतिशत रह गई। अध्ययन में पाया गया कि 2000 और 2011 के बीच कर्ज में घातांकी बढ़त हुई है। 
 
दूसरे शब्दों में कहें तो कृषि क्षेत्र में बड़े कर्ज लेने वालों की संख्या बढ़ी है और छोटे, सीमांत या मझोले किसान कर्ज की सुविधा से दूर हुए हैं और यह बड़े कारोबालियों के हित में दिया गया है।  इसके अलावा कर्ज के वितरण के मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल जनवरी से मार्च के बीच करीब 46 प्रतिशत कर्ज वितरण होता है, यह वह अवधि है, जब देश में कृषि गतिविधियां बहुत मामूली होती हैं।  इस कर्ज बंटवारे से सामान्य अवधारणा बनती है कि ज्यादातर कर्ज बड़ी कृषि फर्मों को दिया गया है।  बहरहाल 2017-18 के अनंतिम आंकड़ोंं से यह भी पता चलता है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने पहले 6 महीनों में कृषि ऋण का बड़ा हिस्सा वितरित किया है और उन्होंने परंपरागत रूप से ज्यादा कर्ज देने वाले राज्यों पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश आदि को चुनौती दी है। 
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