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कोकिंग कोयले के दामों से इस्पात क्षेत्र को झटका

श्रेया जय | नई दिल्ली Dec 31, 2017 09:29 PM IST

वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट से जूझ रहे घरेलू इस्पात क्षेत्र को कोकिंग कोयले की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की वजह से देश में भी राहत नहीं मिल पा रही है। वैश्विक कीमतों की वजह से ही गत वर्ष जनवरी में कोकिंग कोल की कीमतों में 200 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और उस वक्त से इसमें कोई सुधार नहीं देखा गया है। हालांकि यह हालात तब है जब वैश्विक कोयले की कीमतें नरम हुई हैं और मुमकिन है कि इससे इस्पात क्षेत्र के लिए आयातित कोयले को बढ़ावा मिले। इंडोनेशियाई कोयले की मौजूदा कीमत 49 डॉलर प्रति टन है और पिछले छह महीने में इसमें सात फीसदी की गिरावट देखी गई है। 

 
घरेलू कोयले की कम उपलब्धता और आपूर्ति की वजह से इस्पात कंपनियां अपने इस्तेमाल के लिए कोकिंग कोयले का आयात कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप कोकिंग कोयले की कीमतों का मानदंड तय करने के लिए देश में कोकिंग कोयले की आपूर्तिकर्ता कंपनियां भारत कोकिंग कोल (बीसीसीएल) और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने गत वर्ष जनवरी में कीमतों में संशोधन किया। यह संशोधन गुणवत्ता वाले कोयले के लिए किया गया था। 13 जनवरी, 2017 को बीसीसीएल की एक अधिसूचना के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के मुताबिक प्रत्येक तिमाही के पहले दिन कीमतों को संशोधित किया जाना था। 
 
यह कदम इस्पात क्षेत्र की आयात निर्भरता कम करने और देसी कोकिंग कोयले को बढ़ावा देने के अनुरूप था। बिजली क्षेत्र द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कोयले के मुकाबले इस्पात क्षेत्र के लिए कोकिंग कोल की 80 फीसदी से अधिक मांग आयात के जरिये पूरी होती है क्योंकि इसकी गुणवत्ता बेहतर है। इस्पात क्षेत्र ने कीमतों में मंदी को लेकर चिंता जताई है। एक प्रमुख इस्पात कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, 'पिछले 11 महीने से कीमतों में कोई संशोधन नहीं देखा गया है। बेहतर गुणवत्ता वाला कोयला महंगा है जिसकी वजह से आयातित कोयले को हटाने का विचार असफल है।'
 
हालांकि कोल इंडिया (सीआईएल) के प्रवक्ता ने ईमेल के जवाब में कहा कि अप्रैल 2017 में सीसीएल और नवंबर 2017 में बीसीसीएल ने कीमतों में संशोधन किया। हालांकि यह जवाब नहीं मिला कि कितना संशोधन किया गया है। सीआईएल के प्रवक्ता का कहना है, 'प्रति टन के आधार पर आयातित कोयले के मुकाबले देसी धुले हुए कोयले की कीमत कम है। हालांकि यह स्वीकार किया जाता है कि गुणवत्ता तुलना करने लायक नहीं है। हालांकि कीमतों की प्रणाली में यह प्रावधान है कि ज्यादा राख वाली सामग्री के लिए छूट दी जाएगी।'
 
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ जोडऩे का काम पहली बार 260 डॉलर प्रति टन पर किया गया था जब विनिमय दर 67.5 रुपये प्रति डॉलर थी। इस तरह बीसीसीएल कोयले के लिए 19 फीसदी राख सामग्री के साथ यह 13,187 रुपये प्रति टन हो गई। न्यूनतम बिक्री कीमत 11,500 रुपये प्रति टन थी और अधिकतम मूल्य 15,500 रुपये था। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि घरेलू कोकिंग कोल की गुणवत्ता खराब होती है ऐसे में इस्पात क्षेत्र में इसका इस्तेमाल उच्च गुणवत्ता के आयातित कोकिंग कोयले में मिलाकर की जाती है।
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