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वेतन वृद्धि से बागान के लाभ पर आघात!

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Dec 31, 2017 09:30 PM IST

चाय कंपनियों के शेयरों की कीमतों में मजबूती की खुशी कुछ ही दिन की साबित हो सकती है, क्योंकि उद्योग को उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की संभावना नजर आ रही है। असम और पश्चिम बंगाल में 11.1 लाख चाय श्रमिकों के वेतन में संशोधन किया जाना है। इसके अलावा, उद्योग को बागान श्रम अधिनियम, 1951 में संभावित संशोधनों का भी डर है। चाय उत्पादन में 60 प्रतिशत हिस्सा श्रम लागत का रहता है और आमतौर पर बागानों तथा ट्रेड यूनियनों के बीच हुई पूर्व सहमति के अनुसार इसमें हर साल वृद्धि होती है। रॉसेल इंडिया के प्रबंध निदेशक सीएस बेदी ने कहा कि वेतन में हरेक 10 रुपये की वृद्धि से उत्पादन लागत छह रुपये तक बढ़ जाती है और इस घटक का सीधे शुद्ध लाभ पर असर पड़ता है।

 
इन कंपनियों द्वारा शुरू की गई हेजिंग और ब्रांडिंग की नई व्यवस्था जैसी नवीन पद्धतियों की वजह से नीलामी में ऊंचे मूल्यों के कारण चाय कंपनियों के शेयरों की कीमतें उच्च स्तर पर चल रही हैं। अनुमानित उत्पादन से कम होने के कारण कोलकाता नीलामी केंद्र में औसत चाय की कीमत 6.5 प्रतिशत तक बढ़कर 157.88 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि गुवाहाटी चाय नीलामी में भी 4.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 140.01 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पश्चिम बंगाल में 4,30,000 श्रमिकों के लिए और असम में 6,80,000 श्रमिकों के लिए 2017 की शुरुआत से वेतन संशोधन लंबित है। पिछला वेतन समझौता 2015 में संपन्न हुआ था और इसका नवीनीकरण किया जाना है। चाय उद्योग के मजदूरी समझौतों में बकाया भी शामिल होता है। पश्चिम बंगाल में ट्रेड यूनियन और चाय कंपनियों को बागान श्रम अधिनियम में एक प्रस्तावित संशोधन से भी निपटना हैं, जो न्यूनतम मजदूरी की सीमा को निर्धारित करेगा। असम में ट्रेड यूनियनों के साथ बातचीत दिसंबर के अंत तक शुरू होगी। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि अब बातचीत पर आधारित वेतन आने की संभावना है, एक बार नया कानून लागू हो जाए तो इसके प्रावधानों को मजदूरी समझौतों में शामिल किया जा सकता है।
 
अधिकारियों ने कहा कि विधेयक में न्यूनतम वेतन की गारंटी देने में नकद कारक पर ही ध्यान दिया गया है। इस संबंध में, चाय कंपनियों ने न्यूनतम वेतन निर्धारित करते समय कर्मचारियों के लाभों पर विचार करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय से संपर्क किया है। परंपरागत रूप में, चाय श्रमिकों को भुगतान का एक हिस्सा नकद होता है और बागान आवास, सब्सिडी वाला राशन, पानी और बिजली कनेक्शन जैसी अन्य सुविधाओं तथा श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था करते हैं। पश्चिम बंगाल और असम में चाय बागानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) के चेयरमैन आजम मोनेम ने कहा कि वेतन में नकद घटक अब करीब 138 रुपये है और बागानों द्वारा प्रत्येक श्रमिक के लाभ के लिए समान राशि व्यय की जाती है। बेदी ने कहा कि मुझे इस बात पर हैरानी है कि अगर विधेयक में इन फायदों को शामिल नहीं किया जाता है तो कितने बागान बचेंगे।
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