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जीएसटी की मार अब भी बरकरार

विनय उमरजी | अहमदाबाद Jan 09, 2018 10:07 PM IST

हाल में संपन्न गुजरात विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत में भले ही सूरत के कपड़ा उद्योग ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई हो, लेकिन उद्योग अब भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चक्करघिन्नी में फंसा हुआ है। खासतौर पर बुनाई और व्यापार में लगे उद्योग के सूत्रों के अनुसार, बिजली से चलने वाले ज्यादातर करघे और व्यापार इकाइयों में क्षमता उपयोग अब भी 50 प्रतिशत या इससे भी कम है। जहां, कताई इकाइयों को बुनाई उद्योग से (ठंडे मौसम केकारण जो वर्तमान में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है) खरीदार मिल रहे हैं, वहीं कपड़ा शृंखला में बुनाई और व्यापार जैसे क्षेत्रों के लिए कारोबार अभी भी अस्थिर बना हुआ है, खासकर छोटे भागीदारों के लिए।

 
पांडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशिष गुजराती ने कहा कि सूरत के 500 अरब रुपये के सिंथेटिक कपड़ा केंद्र में चार करोड़ मीटर प्रतिदिन उत्पादन के मुकाबले वर्तमान उत्पादन गिरकर 25 लाख मीटर प्रतिदिन पर गया है। इसी प्रकार, बुनाई क्षेत्र का कारोबार भी जीएसटी से पूर्व काल के 60 करोड़ रुपये प्रतिदिन की तुलना में अब भी 50 प्रतिशत कम है। इसके अलावा, बिजली करघों का अपनी दुकानें बंद करना भी जारी है। मौटे तौर पर 250-300 करघे प्रतिदिन बेकार होकर हट रहे हैं, हालांकि अक्टूबर की तुलना में यह रफ्तार कम हुई है। इसके अतिरिक्त, अभी भी कई व्यापारियों और बुनकरों का कर प्रणाली के तहत आना और उनका पंजीकरण होना बाकी है।
 
सूरत कपड़ा व्यापार-उद्योग के लिए जीएसटी में बदलाव की मांग करने वाले प्रमुख व्यापारियों में से एक हितेश सकलेचा ने कहा कि छोटे व्यापारियों को अभी भी चोट पहुंच रही है। यह मसला केवल व्यापारियों का पांच फीसदी जीएसटी भुगतान करने का ही नहीं है, बल्कि यह एकाउंटेंट को काम पर रखने की अतिरिक्त लागत और प्रौद्योगिकी में निवेश करने का भी मसला है, जो छोटे व्यापारियों की जेबों पर मार कर रहा है। इससे कारोबार में 50 फीसदी गिरावट आई है। सामान्य परिस्थितियों में सूरत के 500 अरब रुपये के इस सिंथेटिक कपड़ा केंद्र में 6,50,000 बिजली करघे, 150-200 थोक कपड़ा बाजार, 20,000 विनिर्माता (10,000 बुनकर, 75,000 व्यापारी, 450 प्रसंस्करण इकाइयों के साथ) और 50,000-60,000 कढ़ाई मशीनें हैं। संकलेचा के अनुसार, रेशम बुनकरों और कपड़ा प्रसंस्करण करने वालों समेत कम से कम तीन अलग-अलग उद्योग संघों ने कारोबार पर जीएसटी के प्रभाव से राहत के लिए केंद्र सरकार से निवेदन किया है। जीएसटी के असर से व्यापार में गिरावट सितंबर और अक्टूबर के महीनों में बढ़ी है। इस समय उद्योग को स्पष्ट रूप से त्योहारी सीजन के सबसे अधिक ऑर्डर प्राप्त होते हैं। इस साल दीवाली के सीजन में सामान्य अक्टूबर का केवल 15 प्रतिशत ही माल निकल पाया।
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