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सस्ती दाल से किसान परेशान

सुशील मिश्र | मुंबई Jan 17, 2018 10:35 PM IST

दाल के गिरते दाम

दाल की कीमतों में लगातार गिरावट से कारोबारियों को भी हो रही परेशानी
दो महीने में दाल की कीमतों में करीब 25 फीसदी की गिरावट
सालाना आधार पर कीमतें 40 फीसदी तक गिरीं
चने के दाम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे
सरकार ने पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया

दाल की कीमतों में लगातार गिरावट से आम उपभोक्ता भले ही खुश हों लेकिन किसानों के लिए यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है। किसानों को उनकी उपज का मूल्य सरकार द्वारा तय की गई कीमतों से भी कम मिल रहा है। पिछले दो महीने में दाल की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक जबकि साल भर में 40 फीसदी तक की गिरावट हो चुकी है। पैदावार अधिक होने की उम्मीद और नई फसल नजदीक होने के कारण कीमतों में गिरावट का सिलसिला फिलहाल थमने के आसार नहीं हैं। चालू सीजन की प्रमुख दलहन फसल चना मंडियों में 4,000 रुपये क्विंटल से नीचे पहुंच चुका है तो वायदा बाजार में 3,800 रुपये क्विंटल के नीचे फिसल गया जबकि सितंबर के आखिरी सप्ताह में मंडियों में इसका दाम 6,450 रुपये क्विंटल था। सरकार ने चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,200 रुपये क्विंटल तय किया है। कीमतों में गिरावट का सीधा असर दाल पर पड़ रहा है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक इस समय मुंबई में चने दाल की थोक कीमत 5,700 रुपये और दिल्ली में 5,000 रुपये क्विंटल है। जो पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी कम है। मुंबई में अरहर दाल 5,000 रुपये, उड़द दाल 5,600 रुपये, मूंग दाल 6,400 रुपये और मसूर 4,200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है जबकि दिल्ली में अरहर दाल 6,200 रुपये, उड़द दाल 5,850 रुपये, मूंग दाल 6,300 रुपये और मसूर दाल 4,650 रुपये प्रति क्विंटल बेची जा रही है। सालाना आधार पर देखा जाए तो थोक बाजार में चना दाल की कीमतों में करीब 42 फीसदी, अरहर दाल में 30 फीसदी, उड़द में 32 फीसदी और मसूर दाल में 24 फीसदी की गिरावट हुई है। पिछले साल खुदरा बाजार में 120 रुपये में बिकने वाली चना दाल इस समय 72 रुपये, अरहर दाल 64 रुपये, उड़द दाल 74 रुपये, मूंग दाल 80 रुपये और मसूर दाल 60 रुपये किलो बिक रही है। 

दाल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, हालांकि घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में हो रही गिरावट को रोकने के लिए सरकार ने बीते 21 दिसंबर को चने और मसूर के आयात पर शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया। इससे पहले पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा चुका है। आयात शुल्क बढ़ाने का असर भी बाजार पर नहीं हुआ और दाल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

दाल कारोबारी रवींद्र जैन कहते हैं कि अगले महीने से नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी जिससे कीमतों में और गिरावट होगी। यही सोचकर किसान और कारोबारी अपने स्टॉक को बेच रहे हैं जिससे बाजार में आवक अधिक हो रही है जबकि खरीदार नहीं है जिसके कारण कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है। जैन कहते हैं कि यह उपभोक्ताओं के लिए तो अच्छी बात है लेकिन किसान और कारोबारियों के लिए चिंता की बात है। दलहन कारोबारी रमेश ठक्कर कहते हैं कि सरकार को यह ध्यान देने की जरूरत है कि उसके द्वारा तय की गई कीमत से कम पर दाल बाजार में न बिके, यह किसानों के लिए परेशानी की बात है तो सरकार की वादा खिलाफी भी है। 

देश में दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित किया जिसका असर भी देखने को मिला। इस बार रबी सीजन में चने और मसूर के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। चालू रबी सीजन में बुआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अभी तक देशभर में 160.91 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हुई है जबकि पिछले साल 154.05 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुआई हुई थी। इस सीजन की सबसे प्रमुख फसल चने का रकबा पहली बार 100 लाख हेक्टेयर की सीमा को पार करके 105.61 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है जो पिछले साल 97.90 लाख हेक्टेयर था। इस बार चने की बुआई पिछले साल की अपेक्षा करीब 10 फीसदी अधिक है। मसूर की बुआई 17.19 लाख हेक्टेयर मेंं हुई जो पिछले साल से अधिक है। 

देश में दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में 229.5 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ जिसमें 93 लाख टन चना, 48 लाख टन अरहर, 28 लाख टन उड़द शामिल है। यह अब तक सबसे ज्यादा उत्पादन है। चालू सीजन में दलहन की रिकॉर्ड बुआई हुई है जिससे उत्पादन भी नया रिकॉर्ड बनेगा। पिछले साल दालों का रिकॉर्ड 2 करोड़ 30 लाख टन उत्पादन हुआ था और इस बार उम्मीद इससे कहीं ज्यादा की की जा रही है। वर्ष 2017 में सरकार ने किसानों से सीधे 20 लाख टन दलहन की खरीद की, जो दालों की सबसे बड़ी खरीद है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस समय देश में करीब 16.97 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है।
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