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तिलहन में तेजी

दिलीप कुमार झा | मुंबई Jan 21, 2018 08:38 PM IST

किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने नवंबर के मध्य में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। इसके बाद खरीफ सीजन के दो प्रमुख तिलहनों के दामों में तीव्र वृद्धि नजर आई है। जहां एक ओर सोयाबीन 19.4 प्रतिशत तक महंगा होकर 3,303 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर नवंबर के बाद से जब सरकार ने शुल्क वृद्धि की घोषणा की थी, मूंगफली के दाम आठ फीसदी चढ़कर फिलहाल 4,700 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बोले जा रहे खरीफ कटाई सीजन के इन दोनों प्रमुख तिलहनों के दाम उछलकर बेंचमार्क (सोयाबीन के लिए 3,050 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली के लिए 4,500 रुपये प्रति क्विंटल) से ऊपर आ गए हैं।

अन्य तिलहनों के दाम भी बढ़े हैं, हालांकि यह बढ़ोतरी कम ही हुई है। दामों में होने वाली किसी संभावित वृद्धि से पहले तेल मिलों ने भी स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इससे किसानों को फायदा होगा और इससे अगले सीजन में उन्हें तिलहनों का रकबा बढ़ाने में प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। पिछले साल के मुकाबले दिसंबर में भारत का वनस्पति तेल आयात 10 प्रतिशत गिरा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता कहते हैं कि रिफाइंड पामोलिन (आरबीडी) के बढ़ते आयात पर नियंत्रण, वनस्पति तेल उद्योग को प्रोत्साहित करने और ताड़ के कच्चे तथा रिफाइंड तेल के बीच मौजूदा 10 प्रतिशत के अंतर को 15 प्रतिशत पर रखने के लिए, रिफाइंड किस्मों पर आयात शुल्क 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत होना चाहिए।

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