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कागज कंपनियों ने बढ़ाए दाम

दिलीप कुमार झा | मुंबई Jan 22, 2018 09:05 PM IST

कागज विनिर्माताओं ने जनवरी से सभी श्रेणियों में अपने दामों में औसतन 2.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। लुगदी और कागज विनिर्माण के रसायन जैसे कच्चे माल के दामों में इजाफे की वजह से ऐसा किया गया है। तीन महीने में यह दूसरी वृद्धि है। कागज कंपनियों ने सितंबर में एक प्रतिशत कटौती के बाद नवंबर में इसे वापस से लिया था। खास श्रेणी के कागज के दाम दो से पांच प्रतिशत के बीच बढ़ गए  हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी कागज की श्रेणी और मिलों के परिचालन क्षेत्र पर निर्भर करती है। साथ ही, लेखन और मुद्रण कागज की कीमतों में जनवरी से 1,000-2,000 रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
 
देश भर की कागज मिलें इस समय अपनी लागत वृद्धि ग्राहकों पर डाल सकती हैं क्योंकि यह ऐसा सीजन होता है जिसमें नोटबुक और पुस्तक प्रकाशकों की मांग बढ़ जाती है और कीमत वृद्धि को वहन कर लिया जाता है। चालू वर्ष के दौरान लेखन और मुद्रण कागज विनिर्माता अपने उत्पाद के दाम बढ़ा चुके हैं। जेके पेपर लि. के मुख्य वित्तीय अधिकारी वी कुमारस्वामी ने कहा कि हमने अपनी उपस्थिति के क्षेत्र केआधार पर अपने उत्पाद की कीमतें विभिन्न प्रकार से बढ़ाई हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बराबरी के लिए सभी उत्पादों की औसत कीमत वृद्धि करीब दो प्रतिशत रही है। इससे पहले हमने सितंबर में की गई कटौती की भरपाई के लिए नवंबर में अपने उत्पाद की कीमत एक प्रतिशत तक बढ़ा दी थी।
 
कागज उत्पादन की लागत को लाभदायक बनाने के लिए जेके पेपर ने अपने कारोबार का पुनर्गठन किया है। पिछले कुछ सालों के दौरान कंपनी ने लाभ के लिए लागत में कटौती के कई उपाय किए हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि लेखन और मुद्रण कागज की कीमतों में हर तरह की बढ़ोतरी से आने वाली तिमाहियों में कंपनी की शुद्ध आय में बढ़ोतरी होगी। अन्य विनिर्माताओं ने भी अपनी उत्पादन लागत कम करने और कारोबारी कार्यकुशलता में सुधार के लिए लागत कटौती के विभिन्न उपायों को अपनाया है।
 
इस बीच, कागज विनिर्माण की प्रमुख कच्ची सामग्री लुगदी के दाम करीब तीन महीने पहले के 650 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 780 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। कोयले की कीमतों में भी खासी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी आपूर्ति बिजली संयंत्रों पर केंद्रित कर दी है। आयातित कोयला भी काफी महंगा हो गया है। वेस्ट कोस्ट पेपर मिल्स लि. के वाइस चेयरमैन सौरभ बांगड़ ने कहा कि अपने उत्पाद की कीमतें बढ़ाने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। पिछले कुछेक महीनों में कोयले और रसायन समेत कच्चे माल के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2.5 प्रतिशत की जिस कीमत बढ़ोतरी का हमने सहारा लिया है, उसमें से केवल 0.5 प्रतिशत ही हमारे लाभ में शामिल होगी। बाकी दो फीसदी पर कच्चे माल की लागत कारक बनेगी। अगर कच्चे माल की कीमत वृद्धि जारी रहती है, तो हमें मार्च तक उपभोक्ताओं पर फिर से बोझ डालने के लिए अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने होंगे। लेकिन इजाफे की मात्रा का फैसला तब के बाजार हालात पर निर्भर करेगा। इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव रोहित पंडित ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत ने पहले ही लगभग 19 लाख टन आयातित कागज हासिल कर लिया है। यह मानते हुए कि दूसरी छमाही के दौरान भी यही रफ्तार जारी रहती है, इस साल कुल आयात 40 लाख टन के आंकड़े को पार कर जाएगा, जबकि पिछले साल यह 30 लाख टन था। इस तरह, पिछले साल से इसमें 25 फीसदी की वृद्धि हो रही है।
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