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दूध की बहुलता, डेयरियों ने घटाए दाम

सोहिनी दास | अहमदाबाद Jan 25, 2018 10:10 PM IST

स्किम्ड मिल्क पाउडर का स्टॉक (एसएमपी) मार्च तक 2,00,000 टन तक पहुंचने के आसार हैं। इससे भारत की डेयरियों को बहुलता की कठिनाई हो रही है। इस सीजन में सहकारी समितियां पहले ही 20 प्रतिशत अधिक दूध से लबालब हैं, लेकिन इस ज्यादा दूध को एसएमपी में बदलने की क्षमता कम है। नतीजे में किसानों को मिलने वाले खरीद के दामों में औसतन 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। दुग्ध सहकारी समितियों ने सरकार से एसएमपी (बफर स्टॉक के रूप में) खरीदने या निर्यात सब्सिडी (क्योंकि एसएमपी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें निर्यात के अनुकूल नहीं हैं) की घोषणा करने की गुजारिश की है। अगर इससे ठीक से नहीं निपटा गया तो अगले सीजन में दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है। देश में 1,600 से 2,000 करोड़ रुपये का एसएमपी स्टॉक होने का अनुमान है।

 
गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि हमने सरकार से कम से कम 20,000-30,000 टन एसएमपी का बफर स्टॉक करने या निर्यात सब्सिडी देने का अनुरोध किया है। इस स्टॉक को गर्मियों के महीनों में (जो कि खरीद के लिए कमजोर सीजन रहता है) निकाला जा सकता है।  संगठित क्षेत्र की दूध खरीद में सहकारी समितियों का योगदान 40 से 60 प्रतिशत होता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में सहकारी समितियां सर्दी के सामान्य मौसम की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक दूध ले रही हैं। सोढ़ी ने कहा कि निजी कारोबारियों ने खरीद पूरी तरह बंद कर दी है, क्योंकि वाणिज्यिक रूप से उन्हें यह व्यावहारिक नहीं लगता है। पिछले महीने से घी के दाम भी 100 रुपये टन तक गिर चुके हैं।
 
वर्तमान में एक अन्य कारणयह है कि कर्नाटक सरकार डेयरी किसानों को पांच रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दे रही है। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) 32 लाख लीटर प्रतिदिन की बिक्री के मुकाबले 72 लाख लीटर दूध रोजाना ले रहा है। केएमएफ चेन्नई, मुंबई और हैदराबाद के बाजारों में सामान्य दूध (तरल) के साथ प्रवेश कर चुका है। पिछले साल केएमएफ ने किसानों को 23 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया था, लेकिन इसकी अपनी खरीद का मूल्य 18 रुपये प्रति लीटर रहता है। शेष सरकारी सब्सिडी होती है। दूसरी जगहों के संचालकों को सब्सिडी के बिना ही बिक्री के लिए केएफएफ के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
 
दक्षिण भारत की एक अग्रणी निजी डेयरी के प्रमुख नाम ने कहा कि यह दूसरे राज्यों के किसानों को दंडित करना है। अगर कोई देश अपनी सरकार से सब्सिडी लेकर भारत में अपने उत्पादों को लागत से नीचे बेचकर डंप करता है, तो हम उसका विरोध कर सकते हैं। यहां केएमएफ विभिन्न राज्यों में दूध और अन्य सामग्री की डंपिंग कर रही है। सोढ़ी ने कहा कि केएमएफ सरकारी सब्सिडी की वजह से दूसरे भागीदारों के मुकाबले 50 रुपये प्रति किलोग्राम से कम पर एसएमपी की बिक्री कर सकती है। इससे अन्य भागीदारों पर भी उस कीमत पर बिक्री करने का दबाव बनता है।   केएमएफ बेंगलूरु के पास रामनगर में नया एसएमपी संयंत्र लगाने पर काम कर रही है। इसका एसएमपी स्टॉक पिछले महीने के 16,500 टन से घटकर वर्तमान में 15,000 टन हो गया है। केएमएफ के एक वरिष्ठï अधिकारी का कहना है कि स्कूलों में मिल्क पाउडर की आपूर्ति कराने वाली राज्य की 'क्षीर भाग्य' योजना के भरोसे वे जून तक एसएमपी के स्टॉक का निपटान करना चाहते हैं, जिसकी मासिक जरूरत 3,000 टन है।
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