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'साल के अंत तक सोना होगा 1,500 डॉलर के स्तर पर'

राजेश भयानी | मुंबई Jan 28, 2018 08:21 PM IST

पिछले 6 सप्ताह में सोने की कीमतों में 120 डॉलर की तेजी के बाद अब विश्लेषक इसमें और मजबूती आने की उम्मीद कर रहे हैं। यह नया अनुमान जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स ने जारी किया है। रॉयटर्स ने हाल में जारी चौथी तिमाही के गोल्ड सर्वे 2017 की रिपोर्ट में कहा है, 'हमें सोने की कीमतें 1,360 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर होने और 2018 के अंत तक 1,500 डॉलर प्रति औंस की ऊंचाई छूने की संभावना है।' सोने की कीमतें मौजूदा समय में 1360 डॉलर के आसपास हैं। यह वह स्तर है जो अगस्त 2016 के बाद दर्ज किया गया था। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में कीमत 1242 डॉलर पर थी।
 
सर्वे में बताया गया है, 'हमारे अनुमान में फेडरल रिजर्व की तीन वृद्घि दर को शामिल किया गया है, हालांकि नए कर सुधार के प्रभाव से संभावित अनिश्चितता सख्ती को बढ़ा सकती है जिससे सोने की तेजी सीमित होगी।' अमेरिकी फेडरल रिजर्व को अगले महीने नया चेयरमैन मिल रहा है और राष्टï्रपति ट्रंप ने जेरोम पॉवेल को केंद्रीय बैंक के अगले प्रमुख के तौर पर मंजूरी प्रदान कर दी है। मौजूदा समय में फेडरल रिजर्व की कमान जैनेट येलन के हाथ में है। इस कदम से अर्थव्यवस्था के लगातार 9 वर्षों तक तेजी से बढऩे के साथ अमेरिकी मौद्रिक नीति में निरंतरता बनी रहने की संभावना है। 
 
वर्ष 2018 में फेडरल की 8 बैठकें होंगी और अगली बैठक में दर वृद्घि नहीं की जा सकती है, लेकिन उसके बाद 3 दर वृद्घि संभावित हैं। यदि दर वृद्घि होती है तो डेट में निवेश बढ़ सकता है जिससे सोने में तेजी के आसार सीमित हो सकते हैं। अब तक कमजोर डॉलर से भी सोने को मजबूती मिली है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि 2017 में केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की अच्छी मांग देखी गई, क्योंकि उन्होंने अपने विदेशी मुद्रा भंडार का लगातार विविधीकरण किया जिसके लिए सोना एक पसंदीदा विकल्प रहा।
 
2017 में चीन 816 टन (एक साल पहले के मुकाबले मामूली रूप से कम) के साथ प्रमुख उपभोक्ता बना रहा, जबकि भारत 762 टन के साथ इस संदर्भ में दूसरे पायदान पर रहा।  भारत के लिए 2017 का दिलचस्प पहलू जीएसटी का क्रियान्वयन था, जिसे नोटबंदी के आठ महीने बाद लागू किया गया था। नोटबंदी के तुरंत बाद सोने की मांग तेजी से बढ़ गई थी और तस्करी की वजह से इसमें गिरावट आ गई, लेकिन जुलाई से जीएसटी क्रियान्वयन के बाद इसमें फिर से अच्छी तेजी आई है। जीएफएमएस सर्वे में कहा गया है कि 2017 में कुल गैर-आधिकारिक आयात या सोने की तस्करी 133 टन (कुल स्वर्ण खपत का 17 प्रतिशत) रही, जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले लगभग 10 टन अधिक है। 3 फीसदी जीएसटी लागू होने के बाद  133 टन में से लगभग 70 प्रतिशत ने पिछले 6 महीनों में अवैध तरीके से भारत में प्रवेश पाया। 
 
2017 की चौथी तिमाही में सोने की मांग सालाना आधार पर 9 प्रतिशत तक घटकर 246.8 टन रही, लेकिन चार तिमाहियों में यह सर्वाधिक रही। सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत ने 2017 की चौथी तिमाही में 216 टन सोने का आयात किया जो सालाना आधार पर 8 प्रतिशत कम है। चौथी तिमाही में निवेश की मांग सालाना आधार पर 22 प्रतिशत तक घटी। यह गिरावट मुख्य रूप से नोटबंदी के बाद पिछले साल शानदार खरीदारी की वजह से भी दर्ज की गई।  सबसे बड़े उपभोक्ता देशों के मामले में सोने की मांग भारत में आखिरी तिमाही में 8 प्रतिशत तक बढ़ी, क्योंकि इसे धनतेरस के दौरान बिक्री में वृद्घि और वर्ष के अंत में कीमतों में आई नरमी की वजह से मदद मिली।
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