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खाद्य सब्सिडी 21 प्रतिशत बढ़ी

बीएस संवाददाता |  Feb 01, 2018 10:08 PM IST

केंद्र सरकार पर 2018-19 में सब्सिडी का बोझ करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 2.93 लाख करोड़ रुपये होने सी उम्मीद है। मुख्य रूप से खाद्य सब्सिडी में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से यह संभावना है। उर्वरक सब्सिडी में 8 प्रतिशत जबकि पेट्रोलियम सब्सिडी में मामूली बढ़ोतरी होगी। ब्याज सब्सिडी 11 प्रतिशत कम होकर 209.2 अरब रुपये रहेगी।  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सब्सिडी जरूरतों पर व्यय 35 प्रतिशत बढ़ेगा। 1.38 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में 1.02 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। कुल मिलाकर खाद्य सब्सिडी 1.69 लाख करोड़ रुपये बढऩे की उम्मीद है, जो चालू वित्त वर्ष के पुनरीक्षित अनुमान में 1.4 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने 2016-17 में 1.1 लाख करोड़ रुपये इस मद में खर्च किए थे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक उदार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना को गर्मी (खरीफ) की फसलोंं के लिए विस्तार दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके उत्पाद की लागत से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा दाम सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमने इसे सैद्धांतिक रूप से लागू करने का फैसला किया है। खरीफ की सभी अघोषित फसलों के एमएसपी कम से कम उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा होना चाहिए।' 

 
बहरहाल मूल्य स्थिरीकरण कोष में सब्सिडी की राशि 2018-19 में  15 अरब रुपये बढ़ी है। चालू साल में यह 35 अरब रहने की संभावना है, जबकि 2016-17 मेंं 34 अरब रुपये थी। यह कोष दलहन का बफर स्टॉक बरकरार रखता है, जिससे बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। उर्वरक सब्सिडी 8 प्रतिशत बढ़कर 2018-19 में 701 अरब रुपये रहने की संभावना है, जो 2017-18 के पुनरीक्षित अनुमान में 649.7 अरब रुपये थी। सरकार ने पेट्रोलियम के लिए 249.3 अरब रुपये सब्सिडी रखा है, जो मौजूदा साल के लिए अनुमानित 244.6 अरब रुपये से मामूली ज्यादा है। जेटली ने तेल के दाम बढऩे के बावजूद आश्चर्यजनक रूप से रसोई गैस और केरोसिन के लिए चालू साल की बजट सब्सिडी में कटौती का अनुमान रखा है। उन्होंने वित्त वर्ष 18 की शुरुआत में 250 अरब रुपये रखा था। 
 
रेटिंग एजेंसी इक्रा में वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रविचंद्रन ने कहा, 'अगर 2018-19 में विनिमय दर 65 रुपये प्रति डॉलर रहती है और कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल रहते हैं तो सब्सिडी की राशि बजट में आवंटित राशि की तुलना में करीब 110 अरब रुपये कम हो सकती है। बहरहाल इस राशि का प्रबंध किया जा सकता है और इसका नकदी और तेल विपणन कंपनियों व शोधन कंपनियों के मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।' 31 दिसंबर को समाप्त चालू वित्त वर्ष के 9 महीने में भारतीय कच्चे तेल बॉस्केट का औसत  मूल्य 54 डॉलर प्रति बैरल रहा है। बुधवार को यह 66.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 
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