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हीरों और रत्नों पर सीमा शुल्क दोगुना

बीएस संवाददाता |  Feb 01, 2018 10:18 PM IST

सरकार ने कटे एवं तराशे हीरों, रंगीन रत्नों और प्रयोगशाला में बनाए गए हीरों पर आयात शुल्क दोगुना कर दिया है। इससे विश्व का सबसे बड़ा हीरा कारोबार केंद्र बनने की भारत की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।  केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने गुरुवार को रंगीन रत्नों सहित सभी प्रकार के हीरों पर सीमा शुल्क वर्तमान 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने की घोषणा की। इसी तरह नकली आभूषणों पर सीमा शुल्क 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया। इसके अलावा आयात शुल्क पर 10 फीसदी सामाजिक कल्याण अधिभार लगाया गया है और शिक्षा उपकर वापस लिया गया है। इस तरह आयात शुल्क पर शुद्ध अधिभार सीमा शुल्क का 7 फीसदी होगा। 

 
सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से हीरा आभूषण निर्यातकों को उत्पादन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता के लिहाज से तगड़ा झटका लगेगा। भारतीय सराफों के लिए चीन समेत प्रमुख उत्पादक देशों के सराफों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा। इसके अलावा सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से भारत के प्रमुख कारोबारी केंद्र बनने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने भारत को हीरा कारोबार का प्रमुख गढ़ बनाने की योजना बनाई है।  केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाली रत्नाभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा, 'सीमा शुल्क में बढ़ोतरी का भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा, जो पिछले कुछ वर्षों से स्थिर बना हुआ है। आम तौर पर विदेशी आयातक कई वजहों से 10 फीसदी आयातित माल वापस लौटाते हैं, जिन पर अब हमें 5 फीसदी शुल्क चुकाना होगा।'
 
भारत ने अप्रैल से दिसंबर, 2017 के दौरान 1.75 अरब डॉलर के कटे एवं तराशे हीरों का आयात किया, जो उससे पिछले वर्ष की इसी अवधि के आयात 1.99 अरब डॉलर से 12 फीसदी कम है।  रीवाशंकर जेम्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रवीण शंकर पंड्या ने कहा, 'भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देेश है, जहां कटे एवं तराशे हीरों पर आयात शुल्क लगाया जाता है। बेल्जियम, हॉन्ग-कॉन्ग जैसे हीरा कारोबार के प्रमुख केंद्रों ने कीमती रत्नों पर आयात शुल्क खत्म किया हुआ है। इसलिए शुल्क से भारत का कटे एवं तराशे हीरों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा।'
 
मुंबई में भारत डायमंड बोर्स (बीडीबी) जैसा विश्व स्तरीय कारोबारी केंद्र मौजूद है। सरकार ने इसके जरिये भारत को कटे एवं तराशे हीरों का वैश्विक कारोबारी केंद्र बनाने की योजना बनाई है। सरकार ने डी बीयर्स, रियो टिंटो, अलरोसा जैसी दुनिया की दिग्गज खनिक कंपनियों को भारत में अपने कारोबारी केंद्र शुरू करने के लिए आमंत्रित किया है।  सरकार ने तर्क दिया है कि बीडीबी में विश्व स्तरीय कारोबारी सुविधाएं होने से लघु एवं मझोले हीरा तराशकारों को बिना विदेश गए अच्छी गुणवत्ता के हीरे खरीदने में मदद मिलेगी। भारत इस समय दुनियाभर में उत्खनित होने वाले करीब 90 फीसदी हीरों की तराशी करता है। 
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