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कैसे हो किसानों का लाभ, बताएगी समिति

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Feb 02, 2018 10:12 PM IST

सरकार फसलों की मौजूदा सभी खरीद प्रारूपों के अध्ययन के लिए वित्त मंत्रालय या नीति आयोग में या संयुक्त रूप से विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर सकती है। ज्यादा से ज्यादा किसानों तक न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ऐसा करेगी। माना जा रहा है कि एमएसपी की गणना सी2 (समग्र लागत) के बजाय ए2+एफएल के 1.5 गुना पर हो सकती है। सरकार का विचार है कि  वैसे खर्च पर मार्जिन की गणना नहीं की जा सकती है, जिस पर वास्तविक रकम खर्च नहीं की गई है। 
 
ए2+एफएल में किसानों के बीज, उर्वरक, रसायन, मजदूरी, ईंधन, सिंचाई आदि पर आए सभी खर्च शामिल होते हैं, जो नकदी या अन्य माध्यमों से किए जाते हैं। इसमें परिवार के दूसरे सदस्यों के श्रमों के मूल्य भी शामिल होते हैं, जिनका भुगतान नहीं होता है। सी2 अधिक व्यापक होता है और इसमें नियत पूंजी परिसंपत्तियों पर ब्याज और किराये भी शामिल होते हैं, जिनकी गणना नहीं हो पाती है।  किसानों को अधिकतम राहत देने के लिए खरीफ बुआई सत्र से पहले अगले तीन से चार महीने में एक आदर्श खरीद प्रणाली की घोषणा हो सकती है। जैसा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषणा की है, इस प्रणाली के दायरे में बड़ी संख्या में फसलें आएंगी। नीति आयोग मध्य प्रदेश में चल रही भावांतर भुगतान योजना सहित सभी मौजूदा खरीद प्रणाली का अध्ययन करेगा। इनमें राज्यों द्वारा की जा रही सीधी खरीदारी के प्रारूप भी शामिल होंगे।
 
खरीद प्रक्रिया में निजी कंपनियों को शामिल करने की संभावनाओं पर भी विचार होगा। बाद में सरकार इन निजी कंपनियों को रकम की भरपाई करेगी। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम खुले दिमाग से पूरे मामले पर विचार करेंगे और कोई एक नजरिया लेकर आगे नहीं बढ़ेंगे।'  2018 के रबी सत्र में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा गेहूं का तय एमएसपी ए2+एफएल लागत से 112.4 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, चना का एमएसपी ए2+एफएल लागत से करीब 73 प्रतिशत और सरसों का एमएसपी ए2+एफएल लागत से 84 प्रतिशत अधिक है।  
 
मध्य प्रदेश की भावांतर योजना तैयार करने में अहम किरदार निभाने वाले चंद ने कहा कि फिलहाल सब्सिडी के सीधे भुगतान की तेलंगाना की योजना पर विचार नहीं हो रहा है। चंद ने कहा कि यह एक यह पूरी तरह आय समर्थन योजना नहीं है, इसलिए इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर अधिकतम संख्या में किसानों का एमएसपी का लाभ मिलता है या वे निश्चित दर पर अपने उत्पाद बेचने में सफल होते हैं तो उस स्थिति में उन्हें आय समर्थन दिया जा सकता है। इससे बीमा और अन्य पहलुओं पर अधिक व्यय हो सकेगा।' चंद ने कहा कि  किसानों को काफी हद तक एमएसपी से ही आय समर्थन हासिल हो जाएगा।
 
आलोचकों का कहना है कि ए2+एफएल लागत पर एमएसपी तय करने का मतलब होगा कि सरकार ने आधिकारिक रूप से स्वामीनाथन फॉर्मूला ठंडे बस्ते में डाल दिया है। स्वामीनाथन ने सी2 लागत को आधार बनाकर एमएसपी तय करने की सिफारिश की है। खैर, जो भी हो एमएसपी के जरिये किसानों की आय सुनिश्चित करने से पंजाब, छत्तीसगढ़, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों में किसानों के जीवन पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। इन राज्यों में खरीद प्रणाली सुदृढ़ है जबकि दूसरे क्षेत्रों में एमएसपी से फसलों का बेहतर आधार मूल्य तय हो पाएगा।   पूर्व कें द्रीय कृषि सचिव शिराज हुसैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हमें यह समझना होगा कि अधिक उत्पादन के बजाय भारी आयात से दालों की कीमत इस साल एमएसपी से नीचे आ गई है। कीमतें कम होने के लिए एमएसपी को दोष देना सही नहीं है।'
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