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कीमती धातु होगी सुरक्षित निवेश की ढाल, सोने से बेहतर रहेगी चांदी की चाल

राजेश भयानी | मुंबई Feb 04, 2018 09:48 PM IST

बहुमूल्य धातुओं में निवेश को वरीयता के आसार

बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में कम उतार-चढ़ाव और दूसरी परिसंपत्तियों में बढ़ते निवेश जोखिम के चलते वर्ष 2018 में बहुमूल्य धातुओं में निवेश को वरीयता मिल सकती है। इसमें भी, सोना और चांदी के बीच एक अच्छी प्रतिस्पर्धा रहेगी, जिसमें चांदी सोने से आगे निकल सकती है। व्यापारी सोना-चांदी अनुपात में आई गिरावट को भी ध्यान में रख रहे हैं। दरअसल, सोना-चांदी अनुपात का अर्थ है, 1 औंस सोने से कितने औंस चांदी खरीदी जा सकती है। वर्तमान में यह अनुपात 78.5 है और इसमें अब बड़ी गिरावट की उम्मीद की जा रही है। जब चांदी की कीमतें सोने की अपेक्षा तेजी से बढ़ती हैं, या जब सोने की कीमतें चांदी की अपेक्षा तेजी से घटती हैं तो इस अनुपात में गिरावट आती है। सिल्वर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, '2018 की शुरुआत में इक्विटी और बॉन्ड के महंगे होने और बिटकॉइन की कीमतों में आई थोड़ी कमी से बहुमूल्य धातुओं में निवेश बढ़ने की उम्मीद है, जिससे चांदी की छड़ों और सिक्कों का मांग बढेगी।'

भारत में चांदी की भी दोहरी भूमिका है। आभूषण के साथ ही औद्योगिक स्तर पर भी इसका प्रयोग होता है। कुल चांदी उत्पादन में से 60 प्रतिशत का उपयोग इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रोनिक्स, सौर पैनल के लिए फोटोवोल्टिक बनाने जैसे औद्योगिक काम में किया जाता है। चांदी की वैश्विक मांग भी बढ़ रही है और विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक 2018 में यह वृद्धि 3.9 प्रतिशत रहेगी, जो 2017 में 3.7 प्रतिशत और 2016 में 3.2 प्रतिशत थी।

पिछले 2 दशक में सोना-चांदी अनुपात 80 के स्तर के आसपास रहा। इसलिए 78.5 का वर्तमान स्तर काफी अधिक दिख रहा है और सिल्वर इंस्टीट्यूट का कहना है, 'हमारा मानना है कि चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहेगा। साल की शुरुआत में ही कीमतें पिछले वर्ष के कुल औसत से अधिक हो गई हैं। सोना-चांदी अनुपात में कमी के लिए भी चांदी में काफी संभावनाएं हैं और यह लंबी समयावधि (20 वर्ष) के औसत (64) के करीब पहुंच सकता है।'

सोना-चांदी अनुपात का पिछले पांच वर्ष का औसत 69.88, 10 वर्ष का औसत 63.7 और 15 वर्ष का औसत 62.5 है। साथ ही, पिछले कुछ वर्ष से चांदी की औसत कीमतें लगभग स्थिर रही हैं, जो लंबी अवधि में मजबूती का संकेत देता है। मेटल्स फोकस मेंं दक्षिण एशिया के शोध सलाहकार चिराग सेठ कहते हैं, 'चांदी बेहतर प्रदर्शन करती हुई दिख रही है, जिस कारण हमें लगता है कि सोना-चांदी अनुपात अपनी संबी अवधि के औसत के करीब आ जाएगा। सोने पर सकारात्मक संकेतों के चलते भी चांदी को फायदा पहुंचेगा। वहीं, चांदी में अधिक खरीदारी से भी इसका प्रदर्शन बेहतर होगा।'

भारत में उपभोग कीमतों से प्रभावित होता है और लोग कम कीमत वाली वस्तुएं खरीदते हैं। संस्थान के अनुमानों के अनुसार, 'भारत में चांदी आयात 2017 में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुना बढ़कर 5700 टन (18.3 करोड़ औंस) हो गया। इस बढ़ोतरी का कारण मांग में तेजी और नगदी के स्थान पर औपचारिक चैनलों द्वारा व्यापार करना है। हमारा मानना है कि 2018 में भी आभूषण निर्माताओं द्वारा चांदी की मांग में तेजी रहेगी, जिससे आयात बढ़कर लगभग 18 करोड़ औंस हो जाएगा।'

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