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एमईपी से आजाद होते ही उछला प्याज

सुशील मिश्र | मुंबई Feb 05, 2018 10:11 PM IST

प्याज के निर्यात पर अंकुश हटते ही इसके भाव में जोरदार तेजी आ गई। प्याज की गिरती कीमतों को देखते हुए सरकार ने इसके निर्यात पर पिछले सप्ताह अंकुश हटा दिया था।  प्याज की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में प्याज के भाव सप्ताह के पहले ही दिन 550 रुपये प्रति क्विंटल उछल गए। पिछले महीने प्याज के थोक भाव में करीब 60 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। हालांकि खुदरा बाजार में ग्राहकों को इसका खास फायदा नहीं मिला था।  पिछले महीने प्याज के दाम में करीब 60 फीसदी की गिरावट के बाद सरकार ने शुक्रवार को न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटाने का फैसला लिया जिसका असर आज महाराष्ट्र की मंडियों पर साफ दिखा। प्याज की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में प्याज के दाम 550 रुपये बढ़कर 2,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। न्यूनतम भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1,000 रुपये और अधिकतम मूल्य 1,740 से उछलकर 2,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पिछले महीने प्याज के भाव में तेज गिरावट हुई थी। लासलगांव मंडी में 5 जनवरी को प्याज का औसत थोकभाव 3,540 रुपये प्रति क्विंटल था और अधिकतम मूल्य 3,800 रुपये प्रति क्विंटल बोला गया था। यहां से कीमतें गिरनी शुरू हुईं और 2 फरवरी को लासलगांव में प्याज का औसत भाव गिरकर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, इसी दिन मंडी में प्याज 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था।  
 
मुंबई के थोक बाजार में प्याज का औसत भाव 1,600 रुपये से उछलकर 2,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। यानी मुंबई में प्याज के भाव महज एक दिन में 650 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए। थोकभाव में बढ़ोतरी होते ही खुदरा बाजार में भी प्याज का रंग बदल गया। पिछले सप्ताह मुंबई में प्याज के खुदरा दाम गिरकर 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गए जो आज 40 रुपये के ऊपर पहुंच गए। कारोबारियों का कहना है कि कीमतें बढऩे की वजह से उन्हें भी दाम बढ़ाने पड़े।  कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए एमईपी को हटाया गया है। कृषि मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के बीच हुई बैठक में अधिकारियों ने फैसला लिया था कि प्याज के दाम 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे आ जाते हैं तो एमईपी खत्म कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि किसानों को 7 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिलना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि मंडियों में प्याज 2,000 रुपये के आस पास रहे। गौरतलब है कि नवंबर महीने में प्याज के दाम तेजी से ऊपर की ओर भाग रहे थे जिन पर अंकुश लगाने और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्याज निर्यात पर 850 डॉलर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगाया गया था। जिसे बाद में घटाकर 700 डॉलर प्रति टन कर दिया गया था। शुरुआत में एमईपी दिसंबर 2017 तक लगाया गया था जिसे बाद में बढ़ाकर 20 जनवरी तक कर दिया गया था। 
 
लासलगांव के अधिकारियों का कहना है कि पिछले सप्ताह जिस भाव में प्याज पहुंच गया था उस पर बेचना किसानों के लिए घाटे का सौदा था इसीलिए किसानों ने मंडियों में माल लाना कम कर दिया। सरकार के फैसले और आवक कम होने के कारण कीमतों में जोरदार तेजी हुई। फिलहाल महाराष्ट्र और गुजरात के कई हिस्सों में नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है इसलिए प्याज में बहुत तेजी की संभावना नहीं है। सरकार मानती है कि प्याज के दाम 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहे। जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। पिछले साल कीमतों में तेज बढ़ोतरी की एक प्रमुख वजह ज्यादा निर्यात भी रही। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में 34.93 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया जिसका मूल्य 4,651 करोड़ रुपये था। वर्ष 2017 में जनवरी से अक्टूबर तक 3,741 करोड़ रुपये का 27.72 लाख टन निर्यात हुआ ।
 
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के अनुसार इस साल प्याज की पैदावार 2.14 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल (2016-17) में 2.14 करोड़ टन पैदावार हुई थी यानी इस बार प्याज की पैदावार करीब 4.5 फीसदी कम है। इस साल पैदावार की कमी की वजह पिछले साल प्याज की बुआई कम होना है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस साल 11.9 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्याज की बुआई हुई है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 8.4 फीसदी कम है।  
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