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खुला खाद्य तेल घटा, डिब्बाबंद बढ़ा

अर्णव दत्ता | नई दिल्ली Feb 08, 2018 10:03 PM IST

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भारतीय उपभोक्ता पड़ोस में किराने की दुकान पर बिकने वाले खुले तेल को छोड़कर ब्रांडेड खाद्य तेल का उपभोग कर रहे हैं जिससे इसकी बिक्री में इजाफा हो रहा है। बाजार अनुसंधान कंपनी यूरोमॉनीटर इंटरनैशनल के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य तेल श्रेणी कुछ साल पहले ही पैकेट बंद भोजन खंड में सबसे बड़े वर्ग 'डेयरी' को पीछे छोड़ चुका है। खाद्य तेल 2017 में 25.6 प्रतिशत बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपये के बाजार को पार कर चुका है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पैकेट बंद खाद्य श्रेणी ने 1.3 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार किया है। 1.2 लाख करोड़ रुपये के साथ खाद्य श्रेणी में डेयरी दूसरा सबसे बड़ा वर्ग रहा। इसमें 2016 के मुकाबले 16.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले साल चावल, पास्ता और नूडल्स सहित पैकेट बंद खाद्य बाजार 378 अरब रुपये का रहा, जिसमें पिछले साल के मुकाबले 23.6 फीसदी का इजाफा हुआ।
 
दरअसल, भारत के 4.34 लाख करोड़ रुपये के पैकेट बंद खाद्य बाजार में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खाद्य तेल का होता है, जबकि चावल, पास्ता और नूडल्स की हिस्सेदारी 8.8 प्रतिशत रहती है। अदाणी विल्मर के मुख्य कार्याधिकारी अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि यह इजाफा मुख्य रूप से नए उपभोक्ताओं की ओर से हो रहा है, जो खुले तेल के मुकाबले ब्रांडेड खाद्य तेल का रुख कर रहे हैं। भारत में कारगिल के खाद्य कारोबार के प्रबंध निदेशक देवकी मुछल ने कहा कि भारत में पैकेट बंद खाद्य तेल की बिक्री संपूर्ण खाद्य तेल की खपत से 2.5 गुना तेजी से बढ़ रही है। सुरक्षित उत्पादों के प्रति बढ़ती जागरूकता, खाद्य कानून प्रशासन का खुले उत्पाद की बिक्री रोकना और सरकार द्वारा अनुचित व्यापार व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई करने से इसकी वृद्धि में मदद मिली। यूरोमॉनीटर के अनुसार; चावल, पास्ता और नूडल्स श्रेणी में कुल 12 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर से 2022 तक तेजी से इजाफा होगा, इसके बाद सुबह के नाश्ते वाले अनाज (10.6 प्रतिशत) का स्थान आता है। हालांकि, खाद्य तेल में नौ प्रतिशत की बढिय़ा दर बनी रहने की संभावना है।
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