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कोटे से संभलेंगे चीनी के दाम, आपूर्ति पर लगेगी लगाम

संजीव मुखर्जी और राजेश भयानी | नई दिल्ली/मुंबई Feb 08, 2018 10:05 PM IST

केंद्र मिलों द्वारा खुले बाजार में बेची जाने वाली चीनी की मात्रा की सीमा तय करने की तैयारी में है। चीनी के दामों में तीव्र गिरावट को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इससे किसानों को गन्ने का जल्द भुगतान करने में मिलों को मदद मिलेगी। एक वरिष्ठï सरकारी अधिकारी ने कहा कि चीनी मिलों की स्टॉक रखने की जो सीमा थी, जिसमें बदलाव किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में नए आदेश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे। मिलों को फरवरी के आखिर तक 31 जनवरी के अपने चीनी स्टॉक का 83 प्रतिशत भाग रोककर रखना होगा और 28 फरवरी को उनके पास जितना चीनी स्टॉक होगा, उसका 86 प्रतिशत भाग मार्च के आखिर तक अपने पास रखना होगा।

 
दूसरे शब्दों में, सरकार ने मिलों द्वारा बाजार में जारी की जाने वाली चीनी की मात्रा निर्धारित कर दी है और यह सीमा अलग-अलग मिलों के लिए अलग-अलग होगी। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा कि सरकार के इस कदम से बाजार की अवधारणा को प्रोत्साहन मिलेगा क्योंकि इससे चीनी की अधिक आपूर्ति पर कुछ नियंत्रण लगेगा और इसके फलस्वरूप गिरते दामों को सुधारने में मदद मिलेगी। सूत्रों के अनुसार यह सीमा निर्धारित करने का आकलन यह है कि सभी मिलें फरवरी और मार्च में 20 लाख टन चीनी बेच सकेंगी, जो इस अवधि के दौरान अनुमानित मांग है। यह कदम हाल ही में पाकिस्तान से सस्ते आयात को रोकने के लिए सरकार द्वारा चीनी पर 50 प्रतिशत के आयात शुल्क को दोगुना करके 100 प्रतिशत किए जाने के बाद उठाया गया है। पाकिस्तान निर्यातकों को सब्सिडी दे रहा है।
 
सरकार ने सितंबर 2016 में पहली बार चीनी मिलों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू की थी। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, तब मिलों को 30 सितंबर, 2016 के अपने स्टॉक का 37 प्रतिशत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं थी। इसी प्रकार, उन्हें 31 अक्टूबर, 2016 के अपने स्टॉक का 24 प्रतिशत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं थी। उस आदेश में कहा गया था कि अधिक मात्रा में चीनी स्टॉक करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के अनुसार, इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना है। स्टॉक की मात्रा पर इस प्रकार की सीमा 2012 से पहले भी थी, जब स्टॉक जारी करने का तंत्र प्रचलित था। उद्योग के एक अनुभवी समीक्षक के अनुसार, एक मसला यह है कि स्टॉक जारी करने की व्यवस्था वाले दिनों में भी कुछ मिलर और चीनी जारी करने के लिए अदालत से आदेश प्राप्त कर रहे थे। इस बार भी ऐसा संभव है।
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