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कितनी खरी स्वर्ण नीति?

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Feb 11, 2018 09:38 PM IST

कसौटी पर सोना

► बजट में किया गया है व्यापक स्वर्ण नीति तैयार करने का प्रस्ताव
भारतीय रिफाइनरियों को परिष्कृत सोने के निर्यात की अनुमति पर चल रही बहस, विभिन्न मंत्रालयों में उभरे मतभेद
वित्त मंत्रालय का कहना है कि निर्यात से जुड़ी क्षमताएं विकसित कर रहा भारत
वाणिज्य मंत्रालय का तर्क है कि ऐसी पहल से देश में बढ़ सकता है कच्चे सोने का आयात

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जब व्यापक स्वर्ण नीति (कॉम्प्रीहेन्सिव गोल्ड पॉलिसी) तैयार करने की घोषणा की है, तब से इस कीमती धातु से जुड़े मुख्य मुद्दों पर विभिन्न मंत्रालयों में मतभेद सामने उभरने लगे हैं। मिसाल के तौर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर बहस चल रही है कि भारतीय रिफाइनरियों द्वारा परिष्कृत शुद्ध सोने के निर्यात को अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। बजट में आगामी स्वर्ण नीति पर विस्तार से कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि गोल्ड बोर्ड और सोने के लिए स्पॉट एक्सचेंज की स्थापना के अलावा भारतीय रिफाइनरियों द्वारा परिष्कृत सोने के निर्यात को अनुमति भी दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि वैसे तो अंतर मंत्रालय समिति ने कई सालों से भारत के स्वर्ण बाजार और अंतरराष्‍ट्रीय व्यापार का अध्ययन किया है, लेकिन पिछले कुछ समय से शुद्ध सोने के निर्यात पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

वित्त मंत्रालय का कहना था कि भारत निर्यात से जुड़ी क्षमताएं विकसित कर रहा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें तय करने में यह अहम भूमिका निभाएगा। चीन के बाद भारत सोने का उपभोग करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। हालांकि वाणिज्य मंत्रालय ने इसके खिलाफ यह तर्क दिया है कि ऐसी पहल देश में कच्चे सोने का आयात भी बढ़ा सकती है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में भारत में 3.39 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात हुआ, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1.97 अरब डॉलर रहा था। स्वर्ण उद्योग के जानकारों के अनुसार सोने की कीमतें निचले स्तर पर रहने और स्थानीय स्तर पर अधिक मांग से इस पीली धातु का आयात बढ़ा है। 

सोने के निर्यात के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना उतना आसान भी नहीं होगा। ऐंजल ब्रोकिंग में मुख्य विश्लेषक (जिसं एवं मुद्रा) प्रथमेश माल्या ने कहा, 'निर्यात का माहौल तैयार करना उतना असरदार नहीं रहेगा क्योंकि घरेलू बाजार में सोने की मांग इतनी अधिक है कि यह निर्यात पर भारी पड़ेगा। रिफाइनरियों के पास देश में ही हमेशा एक बड़ा बाजार उपलब्ध होगा और वे इसे ही पहले सोना बेचेंगे।' पिछले साल अगस्त में सरकार ने अनियमितताओं (खासकर सोने के सिक्कों और पदकों आदि की राउंड ट्रिपिंग) पर अंकुश लगाने के लिए 22 कैरट से अधिक शुद्धता वाले स्वर्ण उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। 

वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अगर सरकार 24 कैरट स्वर्ण उत्पादों के निर्यात की अनुमति देती है तो रिफाइनरियों को श्रेष्ठï गुणवत्ता के पालन के लिए अंतरराष्टï्रीय मानकों का अनुसरण करना होगा। भारत इस समय लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन की तर्ज पर इंडियन स्वर्ण मानक (इंडियन गोल्ड स्टैंडर्ड) विकसित कर रहा है। गोल्ड रिफाइनिरयों को मानक संबंधी अनिवार्यताएं पूरी करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के साथ सूचीबद्ध होना पड़ेगा। जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल में कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने कहा कि सरकार को आभूषणों का निर्यात बढ़ाने के लिए उपाय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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