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बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान

सुशील मिश्र | मुंबई Feb 12, 2018 10:00 PM IST

फसल की कम कीमत मिलने से परेशान किसानों पर अब बेमौसम बारिश से मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले दो दिन से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हो रही बारिश के साथ ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। चने, गेहूं और सरसों की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है, जिसका असर बाजार पर भी दिखाई पड़ रहा है। बाजार में गेहूं और चने के भाव बढ़ गए हैं। बेमौसम बारिश का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। नुकसान और बढ़ सकता है। हालांकि अगर हल्की बारिश होती है तो यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।  
 
सरकार द्वारा तय कीमत से भी कम पर चना और गेहूं बेचने को मजबूर किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बारिश और ओलावृष्टि से महाराष्ट्र के अकोला, जालना, बीड़ और अमरावती में गेहूं, चना और अंगूर की फसल को नुकसान पहुंचा है। खुले में पड़ा प्याज भीग गया है। किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से गेहूं की बालियां पूरी तरह बिखर गई हैं। चने की खड़ी गिल्टियां नीचे गिर गई हैं। पकने वाली फसल गिर गई है। बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज हवा से गेहूं की खड़ी फसल गिर गई है। अंगूर के साथ प्याज, आलू, सरसों सहित दूसरी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कहते हैं कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है। किसान परेशान न हों, सरकार उनके साथ है। पिछले दो दिन से देश के कई इलाकों में हो रही बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश में हुआ है। राज्य के करीब 400 गांवों में भारी नुकसान की बात कही जा रही है। मध्य प्रदेश में आधी से ज्यादा फसल खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवा से नुकसान तो हुआ है लेकिन अभी इस नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता है। 
 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके कहा कि किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं, उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी।  उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी मौसम की मार पड़ी है। राज्य में गेहूं के साथ-साथ आलू की फसल भी प्रभावित हुई है। कृषि मामलों के जानकार राकेश केशरवानी कहते हैं कि अभी मौसम साफ नहीं हुआ है। इसलिए किस फसल को कितना नुकसान हुआ, यह कहना मुश्किल है, लेकिन रबी सीजन की लगभग सभी फसलें प्रभावित हुई हैं। उनका कहना है कि बारिश से सिर्फ नुकसान ही नहीं बल्कि फायदा होने की भी संभावना है। देश में करीब 65 फीसदी असिंचित क्षेत्र है। ज्यादातर फसलों में विशेषकर गेहूं में सिंचाई का समय है। ऐसे में हल्की बारिश होती है तो फसलों के लिए लाभदायक है लेकिन इस समय ओलावृष्टि और भारी बारिश फसलों के लिए नुकसानदेय है। इससे रबी दलहन सहित सभी फसलों को नुकसान होगा, क्योंकि भारी बारिश और तेज हवा से खड़ी फसल गिर जाएगी जिसका असर गेहूं, चना, सरसों और दलहन के उत्पादन पर पड़ेगा। 
 
फसलों पर मौसम की मार अभी और पड़ सकती है। मौसम विभाग की मानें तो 14 फरवरी तक जम्मू कश्मीर से लकर मध्य भारत में मध्य प्रदेश और पूर्व में बिहार तक तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में चक्रवाती क्षेत्र बन गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेज बारिश हो सकती है। उत्तर और मध्य भारत के ज्यादातर राज्य खराब मौसम की चपेट में आ सकते हैं जिससे नुकसान बढ़ सकता है।   गौरतलब है कि इस साल देश में दलहन की रिकॉर्ड पैदावार होने का अनुमान लगाया गया था। देश में दलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित किया जिसका असर देखने को मिला। इस बार रबी सीजन में चने और मसूर के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। चालू रबी सीजन में चने का रकबा 100 लाख हेक्टेयर किया तो मसूर का 20 लाख हेक्टेयर के करीब था। वर्ष 2016-17 में 229.5 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ जिसमें 93 लाख टन चना, 48 लाख टन अरहर, 28 लाख टन उड़द शामिल हैं। ये अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन है। चालू सीजन में दलहन की रिकॉर्ड बुआई हुई है जिससे उत्पादन भी नया रिकॉर्ड बनाएगा। पिछले साल दाल का रिकॉर्ड 2 करोड़ 30 लाख टन उत्पादन हुआ था और इस बार उम्मीद इससे कहीं ज्यादा की है। वर्ष 2017 में सरकार ने किसानों से सीधे 20 लाख टन दलहन की खरीद की, जो दालों की सबसे बड़ी खरीद है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस समय देश में करीब 16.97 लाख टन दाल का बफर स्टॉक है। इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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