होम » Commodities
«वापस

गेहूं बाजार में अनिश्चितता

राजेश भयानी | मुंबई Feb 13, 2018 09:48 PM IST

देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान ओलावृष्टि से गेहूं की फसल और गुणवत्ता के लिए अनिश्चिताएं पैदा हो गई हैं। वहीं मध्य प्रदेश सरकार के अतिरिक्त बोनस की घोषणा से अन्य राज्यों में भी ऐसी मांग उठ सकती हैं।  सरकारी आंकड़ों में इस साल 9.56 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान जताया गया है, जो 10 करोड़ टन के स्तर तक पहुंचने की संभावना थी। लेकिन ओले गिरने और मध्य प्रदेश और सौराष्ट्र की मंडियों में आ रहे गेहूं की गुणवत्ता की शुरुआती रिपोर्टों से बड़े नुकसान की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। सीजन के आखिर में ठंडा मौसम गेहूं के लिए बहुत अच्छा होता है क्योंकि इससे उत्पादकता बढ़ती है। इसलिए कम तापमान से इस सीजन में गेहूं के ज्यादा उत्पादन की उम्मीद जगी थी, लेकिन ओलावृष्टि से गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। 
 
एक कारोबारी विश्लेषक ने कहा, 'मध्य प्रदेश और सौराष्ट्र की मंडियों में जल्द आने वाले गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इन क्षेत्रों में बेहतर गुणवत्ता का गेहूं बोए जाने के बावजूद किसानों को फायदा नहीं मिलेगा।' केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने खाद्यान्न खरीद की रणनीति बनाने के लिए गुरुवार को एक बैठक बुलाई है। इसमें गेहूं खरीद का लक्ष्य भी तय किया जा सकता है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एक महीने बाद खरीद शुरू करेगा, लेकिन मध्य प्रदेश के किसानों ने बाजार में अगेती किस्म का गेहूं कमजोर गुणवत्ता या नमी की वजह से बेचना शुरू कर दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने 2018 के रबी सीजन के लिए 200 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा की है। कारोबारी हलकों के मुताबिक भावांतर भुगतान योजना गेहूं में लागू की जा सकती है और मध्य प्रदेश में वास्तविक खरीद कम रह सकती है। 
 
आटा मिलें फायदे में रहेंगी क्योंकि उन्हें सीजन के दौरान उस गुणवत्ता के गेहूं की आपूर्ति मिलती रहेगी, जिसकी उन्हें जरूरत होती है। एक अन्य मिल मालिक ने कहा कि उन्हें कम कीमतों पर गेहूं खरीदने की पेशकश मिल रही हैं, लेकिन हम कम कीमतों पर ऑर्डर देने से पहले नमी सूखने का इंतजार करेंगे।  नवी मुंबई की फ्रेंडशिप ट्रेडर्स के देवेंद्र वोरा ने कहा, 'मध्य प्रदेश में ऊंचे बोनस, ओलावृष्टि से गुणवत्ता पर असर पडऩे के आसार और भारी उत्पादन के कारण आगे गेहूं बाजार को लेकर कई अनिश्चितताएं हैं। सरकार के लिए किसानों के हितों और राजकोषीय स्थिति के बीच संतुलन साधना एक चुनौती होगी।' अन्य गेहूं उत्पादक राज्यों में भी ऊंचे बोनस की मांग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  प्रदेश में मंडियों में पहुंच रहा नमी वाला नया गेहूं 1,650 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा है, जबकि गुजरात की राजकोट मंडी में कीमतें 1,500 से 1,700 रुपये चल रही हैं। पश्चिम एशिया और कुछ अन्य देशों से विशेष रूप से मैदा के लिए निर्यात पूछताछ बढ़ रही हैं। अगर कीमतें कम बनी रहीं तो मिल मालिक इस सीजन में बड़े निर्यात अनुबंध करेंगे। 
कीवर्ड agri, farmer, wheat,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक