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लौह अयस्क व्यापार में आ रही मजबूती

अदिति दिवेकर | मुंबई Feb 13, 2018 09:49 PM IST

भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क निर्यातक राज्य गोवा के लौह अयस्क निर्यात में तीव्र गिरावट के बावजूद देश के कुल लौह अयस्क (पेलेट समेत) व्यापार की मात्रा में अप्रैल-दिसंबर 2017 के दौरान सालाना आधार पर 1.36 फीसदी का इजाफा हुआ है। इंडियन पोर्ट एसोसिएशन (आईपीए) के आंकड़ों के अनुसार, नौ महीनों की इस अवधि के दौरान भारत के कुल लौह अयस्क व्यापार की मात्रा 3.346 करोड़ टन रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह मात्रा 3.301 करोड़ टन थी। इस साल मुंबई और न्यू मंगलूर बंदरगाहों ने निर्यात में अधिक योगदान किया जिससे गोवा मुरगांव बंदरगाह से निर्यात में हुई हानि पूरी हो गई। हालांकि, इस समीक्षा अवधि के दौरान व्यापार की कुल मात्रा में लौह अयस्क व्यापार का हिस्सा कुछ कम होकर 6.7 फीसदी रहा, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2016 में यह 6.9 प्रतिशत था। न्यू मंगलूर बंदरगाह में यातायात प्रबंधक वाईआर बेलगल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि मेक इन इंडिया पहल के तहत केआईओसीएल (कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी) ने समुद्र तट के जरिये ओडिशा से लौह अयस्क का आयात फिर से शुरू कर दिया है और इतनी ही मात्रा में लौह अयस्क के पेलेट का ईरान को निर्यात किया है। इस कारण अयस्क व्यापार की मात्रा पिछले साल (अप्रैल-दिसंबर के दौरान) के मुकाबले दोगुनी रही है।
 
सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी केआईओसीएल लिमिटेड इस्पात मंत्रालय के अधीन है जिसका मंगलूर में पेलेट विनिर्माण संयंत्र है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से 58 प्रतिशत उच्च लौह तत्त्व वाले अयस्क की मांग रहने के कारण समीक्षाधीन अवधि में गोवा से लौह अयस्क निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 38 प्रतिशत घट गया है। चूंकि गोवा के 58 फीसदी और इससे अधिक लौह तत्त्व वाले लौह अयस्क के निर्यात पर 30 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगता है, इसलिए इस क्षेत्र के खनिक निर्यात के अवसर गंवा रहे हैं।
 
गोवा मिनरल ओर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव ग्लेन कालवम्परा ने कहा, '30 प्रतिशत शुल्क से हमें काफी चोट पहुंच रही है। दो महीने (अक्टूबर-नवंबर) के अंदर ही गोवा से लौह अयस्क निर्यात गिरकर 7,00,000 टन से भी कम रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 20,00,000 टन से भी अधिक था।' गोवा निम्र श्रेणी वाले लौह अयस्क का खनिक है। यह अपने ज्यादातर अयस्क का निर्यात करता है, क्योंकि इस जिंस की घरेलू इस्पात बाजार में मांग नहीं है। घरेलू इस्पात बाजार में 62 प्रतिशत से अधिक लौह तत्त्व वाले अयस्क की मांग रहती है। हालांकि, गोवा का लौह अयस्क प्रमुख रूप से 58 प्रतिशत लौह तत्त्व से कम का होता है, लेकिन खनिक शोधन के जरिये इसकी श्रेणी में तीन प्रतिशत तक का इजाफा कर रहे हैं, जिससे इसे निर्यात बाजार के अनुकूल बनाया जा सके। निर्यात किए जाने वाले लौह अयस्क की श्रेणी जितना उच्च होती है, विदेशी बाजार में उससे उतना ही अधिक आमदनी प्राप्त होती है।
 
कालवम्परा कहते हैं, 'हालांकि, शोधन प्रक्रिया से गोवा के खनिकों की लागत बढ़ जाती है, लेकिन फिर भी हम इससे अच्छी आय हासिल कर सकते हैं। परंतु ऊंचे कर की वजह से, जो अन्य राज्यों की तुलना में असमान रहता है, गोवा के खनिक नुकसान झेल रहे हैं। 30 प्रतिशत के निर्यात शुल्क के अलावा (58 प्रतिशत से अधिक लौह तत्त्व वाले अयस्क पर) डीएमएफ (जिला खनिज कोष) 30 प्रतिशत और गोवा लौह अयस्क कोष का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर भी लगता है जिसे डीएमएफ में ही शामिल कर लिया जाना चाहिए था।' मुंबई बंदरगाह, जो गोवा के लौह अयस्क व्यापार के नुकसान को भी पूरा कर रहा है, सज्जन जिंदल के डोल्वी संयंत्र को आपूर्ति कर रहा है। इस समीक्षाधीन अवधि के दौरान कंपनी ने 55 लाख टन लौह अयस्क का आयात किया है। इस बंदरगाह ने पिछले साल की इस अवधि में इतनी ही मात्रा में आयात किया था।
 
हालांकि, दिसंबर तक कुल लौह अयस्क व्यापार की स्थिति संतोषजनक लगती है, लेकिन वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि ओडिशा सरकार द्वारा सात लौह अयस्क खदानों को स्थगित किए जाने से वित्त वर्ष 2018 में व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पट्टïाधारकों द्वारा 31 दिसंबर की समय-सीमा पूरी करने में विफल रहने के बाद इस महीने के शुरू में ओडिशा सरकार ने सात लौह अयस्क खदानों के परिचालन पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2000 और 2011 के बीच अवैध अयस्क खनन के लिए पट्टïाधारकों के जुर्माना भुगतान के लिए यह तारीख निर्धारित की थी।
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