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कपड़ा उद्योग के अटके 16 अरब रुपये

टीई नरसिम्हन | चेन्नई Feb 20, 2018 10:18 PM IST

कपड़ा उद्योग का आरोप है कि राज्य शुल्कों से राहत (आरओएसएल) योजना के अंतर्गत तैयार वस्त्रों को अदा की जाने वाली करीब 16 अरब रुपये की राशि का सरकार द्वारा भुगतान नहीं किया गया है और इस विलंब का उनके पूरे कारोबार तथा कार्यशील पूंजी पर असर पड़ रहा है। इस संबंध में उद्योग संगठन ने सरकार को एक पत्र भेजा है जिसमें उसने बकाये के तत्काल भुगतान की गुहार लगाई है जिसके अभाव में सैकड़ों इकाइयां बंद हो जाएंगी और इससे हजारों लोगों के सामने नौकरी छोडऩे की नौबत पैदा हो जाएगी।

 
उद्योग के अनुसार, 2016-17 में सरकार ने चार अरब रुपये आवंटित किए थे और वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आरओएसएल योजना में वास्तविक आवंटन 15.55 अरब रुपये था जिसे संशोधित बजट में बढ़ाकर 18.55 अरब रुपये कर दिया गया। वर्ष 2018-19 के लिए केंद्रीय बजट में आरओएसएल आवंटन 21.64 अरब रुपये रहा। उद्योग का कहना है कि हालांकि, यह आवंटित राशि मौजूदा जरूरतों के लिए भी पर्याप्त नहीं होगी और अदायगी में भी विलंब हुआ है तथा मार्च 2017 के बाद से आरओएसएल की राशि केवल निर्यातकों को ही प्रदान की गई है। उद्योग को इस बात की चिंता है कि इसकी अदायगी केवल मई 2017 तक के निर्यात के लिए ही की गई है और कुछ निर्यातक इकाइयों ने तो केवल मार्च 2017 तक की ही आरओएसएल राशि प्राप्त की है।
 
2017-2018 में 15.55 अरब रुपये के वास्तविक आवंटन के स्थान पर 18.55 अरब रुपये के संशोधित बजट के मद्देनजर तैयार वस्त्र क्षेत्र के लिए यह बकाया 23.45 अरब रुपये है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2016 से 31 मार्च, 2018 के बीच तैयार वस्त्रों का यह बकाया करीब 13.68 अरब रुपये होगा और तिरुपुर निटवियर एक्सपोट्र्स के लिए यह तकरीबन 3.30 अरब रुपये होगा। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन से उद्योग के एक प्रतिनिधि ने कहा कि भारी बकाया है और जिन निर्यातक इकाइयों ने वास्तव में आरओएसएल की राशि के आधार पर अपने दिन-प्रतिदिन के परिचालन की योजना तैयार की थी और अन्य वित्तीय वादे किए थे, उन पर खासा असर पड़ा है। संगठन ने कहा कि आवंटित राशि मौजूदा जरूरत को पूरा करने के लिए अपर्याप्त रह सकती है और उद्योग को वित्तीय संकट से उबारने के वास्ते धन व्यय के लिए सरकार को जल्द से जल्द आवंटन में बढ़ोतरी करने की आवश्यकता है।
 
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक अधिकारी ने कहा कि लघु एवं मध्यम उद्यम वाली तिरूपुर निर्यातक इकाइयां आरओएसएल राशि समेत जीएसटी रिफंड के बकाये की वजह से कार्यशील पूंजी की समस्या का सामना कर रही हैंं। निर्यातक इकाइयों द्वारा झेेले जा रहे मौजूदा संकट से निजात दिलाने के लिए आरओएसएल राशि के जल्द भुगतान कराने को एसोसिएशन केंद्रीय कपड़ा मंत्री, कपड़ा मंत्रालय के सचिव और कपड़ा आयुक्त से बार-बार गुजारिश करती रही है।
कीवर्ड ROSL, textiles, कपड़ा एवं परिधान नीति,

  
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