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अनुबंध आधारित खेती एपीएमसी अधिनियम से आएगी बाहर!

दिलीप कुमार झा | मुंबई Feb 20, 2018 10:19 PM IST

कृषि जिंसों से जुड़े विभिन्न संबंधित पक्षों की सिफारिशों के बाद सरकार कंपनियों को दीर्घावधि के लिए किसानों की जमीन लेने कीअनुमति देने पर विचार कर रही है। यह अनुमति 'अनुबंध आधारित खेती' (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) पर तैयार हो रहे नए दिशानिर्देशों के आधार पर दी जाएगी। ये दिशानिर्देश एक समिति तैयार कर रही है, जिसकी अध्यक्षता अशोक दलवाई (मुख्य कार्याधिकारी, नैशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी, केंद्रीय कृषि मंत्रालय) कर रहे हैं। पहली बार दिसंबर 2017 में आए अनुबंध आधारित खेती पर आदर्श मसौदा दिशानिर्देशों में कंपनियों को किसानों की जमीन कम से कम एक सत्र और अधिकतम पांच वर्षों के लिए लेने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान है। अनुबंध आधारित खेती राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कृषि उत्पाद एवं मवेशी अनुबंध कृषि अधिनियम, 2018 के नाम से भी जाना जाता है। 
 
दिलचस्प बात है कि कृषि क्षेत्र के कई संबंधित पक्षों ने पांच साल की अधिकतम समय सीमा का प्रावधान समाप्त करने का सुझाव दिया  है  ताकिकंपनियां किसानों के साथ लंबी अवधि के लिए समझौते कर सकें। कई पौधे जैसे पाइनऐपल और पाम पौधरोपण के तीन से चार साल बाद फल देते हैं। इन वर्षों में किसानों को आजीविका चलाने के लिए आय की दरकार होती है। पौधे लगाए जाने के बाद फल आने के दौरान लंबे इंतजार के कारण कंपनियों और किसान दोनों में किसी ने भी ऐसे पौधे लगाने में दिचलस्पी नहीं दिखाई है। यही वजह है कि सरकारी प्रोत्साहनों के बाद भी पाम की खेती भारत में कभी सफल नहीं रही है। 
 
समिति में शामिल उप कृषि विपणन सलाहकार एवं सदस्य सचिव एस के सिंह ने कहा, 'हमें विभिन्न संबंधित पक्षों से कई सुझाव मिले हैं, जिनमें अनुबंध आधारित खेती पर समय सीमा हटाए जाने की बात कही गई है। मार्च में आने वाले संशोधित दिशानिर्देश में समय सीमा का जिक्र नहीं होगा। कंपनियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिले। सरकार भी निवेशकों को पर्याप्त लाभ देने के लिए दिशानिर्देश लाएगी। नए दिशानिर्देश से कंपनियों को कीमतें पहले ही तय (फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) करने में मदद मिलेगी और वे गुणवत्ता, रखरखाव, परिवहन एवं कृषि उत्पादों के विपणन की जिम्मेदारी लेंगी।'
 
हालांकि फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट में तय कीमतें कृषि उत्पादों के लिए तय होने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम नहीं होना चाहिए। उत्पादों की गुणवत्ता कमजोर रहने की स्थिति में कृषि जिंसो के प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में हालांकि केंद्र अनुबंध आधारित खेती को कृषि उत्पाद विपणन समित (एपीएमसी) से बाहर करने पर विचार कर रही है। ताजा कृषि उत्पाद के प्रसंस्करण और मूल्य वद्र्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऐसा करेगी।  महिंद्रा एग्री सर्विसेस लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी अशोक शर्मा ने कहा, 'अनुबंध आधारित खेती किसानों को उनके उत्पाद की बेहतर कीमत दिलाने के  महत्त्वपूर्ण उपायों में एक है। हालांकि यह व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने के लिए कंपनियों और किसानों दोनों को अनुबंध की शर्तों का पालन करना होगा। आदर्श कानून में कीमतें निर्धारित करने के तरीके का जिक्र है, साथ ही अधिक अनिश्चितता और अनुबंध के उल्लंघन की स्थिति में मुआवजे के प्रावधान से पूरी प्रक्रिया और विश्वसनीय हो जाती है।' 
कीवर्ड agri, farmer,

  
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