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कागज कंपनियों को मुनाफा

अजय मोदी | नई दिल्ली Feb 22, 2018 09:58 PM IST

डिजिटल अर्थव्यवस्था में विस्तार के बावजूद जेके पेपर, वेस्ट कोस्ट पेपर और इंटरनैशनल पेपर जैसी भारतीय पेपर कंपनियां चालू वित्त वर्ष में अपने सबसे अधिक मुनाफे के प्रदर्शन की इबारत लिखने जा रही हैं। इन कंपनियों का मुनाफा वित्त वर्ष 2017-18 के पहले नौ महीनों में ही वित्त वर्ष 2016-17 के आंकड़े को पार कर गया। इसका श्रेय बेहतर क्षमता, अनुकूल कीमत के हालात और ब्याज व्यय में कमी को जाता है। जेके पेपर ने वित्त वर्ष 2018 की अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान 1.9 अरब रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इसमें पिछले साल के मुकाबले 75 फीसदी की बढ़त हुई है। वित्त वर्ष 17 में अर्जित शुद्ध लाभ 1.62 अरब रुपये था। वेस्ट कोस्ट पेपर ने इस वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 1.44 अरब रुपये अर्जित किए। पिछले साल के मुकाबले इसमें 85 फीसदी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 17 में यह लाभ करीब 1.3 अरब रुपये था। इस क्षेत्र की कई अन्य पेपर कंपनियों की भी यही कहानी है। पिछले महीने इन कंपनियों के शेयर की कीमत नई ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। प्रमुख कागज विनिर्माताओं की राजस्व वृद्धि लगभग समान रही है क्योंकि ये विनिर्माता एक साल से भी अधिक समय सेसौ प्रतिशत क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं।
 
वेस्ट कोस्ट पेपर के वाइस चेयरमैन सौरभ बांगड़ का कहना है कि बाजार की धारणा में सुधार हुआ है। कच्चे माल की लागत का 40 से 45 प्रतिशत रहने वाली लकड़ी की कीमतें पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान सुविधाजनक स्तर पर रही हैं। कच्चे तेल और रसायनों की लागत में वृद्धि के बाद दिसंबर से हम कागज की कीमतों में 2-2.5 प्रतिशत तक की वृद्धि करने में सक्षम हुए हैं। चूंकि बाजार में कोई नई क्षमता नहीं आ रही है, इसलिए आपूर्ति पक्ष से कुछ कमी आएगी और बाजार मजबूत रहने की उम्मीद है।
 
इनकी कंपनी ने पिछले एक साल में दीर्घकालिक ऋण एक अरब रुपये तक घटा दिया है। मौजूदा दीर्घकालिक ऋण लगभग 2.75 अरब रुपये है। उन्होंने कहा कि चूंकि कोई पूंजीगत व्यय योजना नहीं है, इसलिए हम ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण को घटाना जारी रखेंगे। वित्त वर्ष 2018 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में वेस्ट कोस्ट की वित्तीय लागत 24.5 करोड़ रुपये थी, जबकि वित्त वर्ष 17 की समान अवधि में यह 43.4 करोड़ रुपये थी। इस महीने की शुरुआत में केयर रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कागज और लुगदी मिल उद्योग ने पिछले पांच सालों में कुछ ही अधिक अनुबंध किया है। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कागज रहित संचार और डिजिटल मीडिया की ओर रुख करना इसकी प्रमुख वजह है। हालांकि, सबसे तेजी से उभरते हुए देशों की तरह भारत में भी मांग बढ़ रही है। भारत में प्रति व्यक्ति कागज खपत लगभग 13 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 57 किलोग्राम है।
 
जेके पेपर के मुख्य वित्त अधिकारी वी कुमारस्वामी ने कहा कि यह लाभ मुख्य रूप से परिचालन में सुधार की वजह से हुआ है। हाल के वर्षों में आपूर्ति बढऩे के कारण हम कुल लागत में बढ़ोतरी के साथ कीमतों को समायोजित नहीं कर सके। हालांकि, अधिक आपूर्ति के हालात ने लेखन और मुद्रण कागज जैसे खंडों में काफी हद तक सुधार किया है। 
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