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इस्पात कंपनियों के लिए मार्च तिमाही शानदार रहने के आसार

उज्ज्वल जौहरी |  Mar 04, 2018 11:48 PM IST

मजबूत प्रदर्शन की संभावना

विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दो वर्षों के दौरान सुधरती प्राप्तियों का लाभ हासिल कर चुकीं भारत की इस्पात कंपनियों को जनवरी-मार्च 2018 तिमाही के लिए भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किए जाने की संभावना है। सरकार द्वारा घोषित उपायों से इन कंपनियों का परिचालन प्रदर्शन मजबूत हुआ है। इन प्रयासों में सस्ते आयात को नियंत्रित करना भी शामिल है जिससे घरेलू प्राप्तियों में सुधार आया है।

चीन में क्षमता मजबूत होने और वैश्विक इस्पात उद्योग के बुनियादी आधार में सुधार से भी इनके लाभ को मजबूत मिल रही है। जहां टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियां तीसरी तिमाही में अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने में सफल रही हैं, वहीं जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) और सेल ने भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किया है। जहां इनका परिदृश्य मजबूत बना हुआ है और आय वृद्धि में सुधार आने की संभावना है, वहीं एनएमडीसी जैसी खनन कंपनियों द्वारा भी अच्छा प्रदर्शन दर्ज किए जाने का अनुमान है।

मजबूत वैश्विक मदद

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च ने हाल में घरेलू इस्पात क्षेत्र पर अपना नजरिया वित्त वर्ष 2019 के लिए वित्त वर्ष 2018 के 'नकारात्मक' से बदलकर 'मजबूत' कर दिया है। मजबूत वैश्विक और घरेलू मांग वृद्धि के साथ साथ चीन में मौजूदा क्षमता इस्तेमाल को देखते हुए घरेलू इस्पात क्षेत्र पर नजरिये में यह बदलाव किया गया है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि उद्योग प्रतिभागी मजबूत बिक्री प्राप्तियों और मार्जिन की मदद से परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दर्ज करेंगे। 

लौह धातुओं के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक चीन द्वारा प्रदूषण घटाने के लिए क्षमताओं पर नियंत्रण का परिणाम दिखा है और इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय इस्पात कीमतों को लगातार ऋण सहायता मिलने की संभावना है। फिलिप कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि चीन की इस्पात कंपनियों का अधिक जोर उस अतिरिक्त कारक पर भी है जिससे इस्पात कीमतों को मदद मिलेगी। इन कंपनियों को मार्जिन मजबूत बनाने की जरूरत है, लेकिन क्षमता वृद्धि और उत्पादन से जुड़ी सीमाएं बिक्री में तेज इजाफा करने की इनकी क्षमता को अवरुद्ध कर देंगी। इस तरह से चीन की इस्पात कीमतें वैश्विक उद्योग के लिए सहायक रहने की भी संभावना है।

दूसरी तरफ, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और आवास क्षेत्र के साथ साथ वाहन क्षेत्र के जरिये मांग में वृद्धि भारत में बरकरार रहने की संभावना है, वहीं अमेरिका और यूरोप में सुधरते परिदृश्य से और ज्यादा मदद मिलेगी।  कंपनियां यूरोप में मांग मजबूत रहने की संभावना के साथ टाटा स्टील यूरोप के प्रदर्शन में सुधार आएगा। टाटा स्टील तीसरी तिमाही में अपने भारतीय परिचालन के लिए 14,025 रुपये प्रति टन का परिचालन मुनाफा (वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में 11,285 रुपये प्रति टन और वित्त वर्ष 218 की दूसरी तिमाही के 10,959 रुपये की तुलना में) दर्ज कर चुकी है। यूरोपीय व्यवसाय ने पूर्ववर्ती तिमाही के 2,896 रुपये की तुलना में 2,589 रुपये प्रति टन का मुनाफा दर्ज किया, हालांकि इसमें आगामी तिमाहियों में सुधार आने की संभावना है।

जेएसडब्ल्यू स्टील के लिए भी परिदृश्य मजबूत है और फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को इस कंपनी पर अपने दृष्टिकोण को 'नकारात्मक' से बदलकर 'मजबूत' कर दिया। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि उद्योग के बुनियादी आधार में सुधार और क्षमता विस्तार के लिए अपनाए गए उपायों से मुनाफे को मजबूत मिलेगी। 

अन्य कंपनियों में जेएसपीएल और सेल की क्षमता वृद्धि मजबूत हो रही है जिससे बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं प्राप्तियां बढऩे से कंपनियों का परिचालन प्रदर्शन और अधिक मजबूत होगा। गिनीज सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख सौमेन चटर्जी का कहना है कि धातु और खनन कंपनियों के लिए बड़े बदलाव दिख रहे हैं और इससे एनएमडीसी तथा कोल इंडिया के प्रदर्शन को भी मदद मिलेगी।

एडलवाइस सिक्योरिटीज का कहना है कि उसे धातु और खनन क्षेत्र में चमक मार्च 2018 की तिमाही में भी मजबूत रहने की उम्मीद है और इस्पात कीमतों में 13-22 फीसदी की तेजी के साथ यह तिमाही जेएसपीएल और एनएमडीसी की आय में बड़ा बदलाव लाएगी। ब्रोकरों का मानना है कि जेएसपीएल अपनी अंगुल परियोजना में इस्पात बिक्री में सुधार की मदद से अपनी सर्वाधिक बिक्री वृद्धि दर्ज करेगी। कोल इंडिया और एनएमडीसी को भी जनवरी 2018 में हुई कीमत वृद्धि का फायदा मिलने की संभावना है।
कीवर्ड इस्पात, भारत,

  
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