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चने और पाम ऑयल पर आयात शुल्क में तीव्र वृद्धि

राजेश भयानी | मुंबई Mar 04, 2018 10:44 PM IST

काले चने पर आयात शुल्क 60 % और सीपीओ पर 44 %

केंद्र सरकार ने पाम ऑयल (ताड़ का तेल) और चने पर आयात शुल्क में तीव्र वृद्धि की है। कच्चे पाम तेल (सीपीओ) पर शुल्क को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 44 प्रतिशत कर दिया गया है और आरबीडी (रिफाइंड किस्म) के आयात शुल्क को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 54 प्रतिशत। काबुली चने (सफेद चना) पर 40 प्रतिशत आयात शुल्क अब बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है। इसी तरह, देसी चने (काला चना) पर 40 प्रतिशत शुल्क को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। इस शुल्क वृद्धि के बाद सीपीओ का मई का वायदा भाव बुर्सा मलेशिया पर करीब तीन प्रतिशत गिरकर 2,469 रिंगिट हो गया।

किसानों के संरक्षण के लिए आयात शुल्क विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के तहत तय दरों तक बढ़ाया जा सकता है। खाद्य तेलों के लिए ये दरें 300 प्रतिशत तक और चने तथा सोयाबीन तेल के लिए क्रमश: 60 प्रतिशत और 45 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती हैं। 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कच्चे वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क को 12.5 से बढ़ाकर 30 प्रतिशत और परिष्कृत किस्म के लिए 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।

सफेद सरसों-सरसों, सोया तेल और सूरजमुखी तेल जैसे नरम तेलों के लिए शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 10 प्रतिशत सामाजिक कल्याणकारी उपकर के बाद काबुली और काले चने पर शुद्ध आयात शुल्क क्रमश: 59.4 प्रतिशत और 66 प्रतिशत हो जाएगा। सामाजिक कल्याण उपकर की गणना केबाद सीपीओ पर प्रभावी दर 48.4 प्रतिशत और रिफाइंड तेल पर 55.9 प्रतिशत हो जाएगी। दोनों के शुल्क प्रभावी रूप से 15.4 प्रतिशत बढ़ गए हैं। भारतीय तेल मिलों की सहायता के लिए पिछले छह महीनों में खाद्य तेल के शुल्कों में कई बार इजाफा किया जा चुका है।

बेहतर फसल की वजह से हाल के महीनों में तेल की कीमतों में काफी कमी आई है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल तथा अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात करता है। यह कुछ मात्रा में यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल और कनाडा से सफेद सरसों का तेल भी खरीदता है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने इस हालिया वृद्धि पर कहा कि यह समय पर हुई है क्योंकि भारत की इन पर निर्भरता भयावह स्तर तक पहुंच रही थी।

चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें इस बात की हैरानी है कि केवल पाम ऑयल ही संरक्षित है। इससे किसानों की मदद का प्रयोजन असफल हो सकता है। अगर सोया, सूरजमूखी और सफेद सरसों के तेल पर आयात शुल्क पाम ऑयल के समानुपात में नहीं बढ़ाया जाता है, तो सरसों की पैदावार होने पर किसानों को अपने साथ धोखेबाजी महसूस होगी। अगर इन तेलों के आयात शुल्क में भी इजाफा नहीं किया जाता है तो इससे किसानों को अधिक तिलहन उपजाने और अपनी आमदनी में बढ़ोतरी के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल हो जाएगा।
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