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आईएसएमए ने एंटी डंपिंग शुल्क याचिका वापस ली

अमृता पिल्लई | मुंबई Mar 05, 2018 10:31 PM IST

इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) ने सोमवार को कहा है कि उसने सोलर सेल और मॉड्यूल्स पर एंटी डंपिंग शुल्क के लिए दी गई याचिका वापस ले ली है, जिसमें जून 2017 तक की जांच की गई थी। एसोसिएशन ने कहा है कि वह जल्द ही नई याचिका दायर करेगा जिसमें ज्यादा विश्वसनीय और ताजा जांच के आंकड़े शामिल होंगे।
आईएसएमए ने एक बयान में कहा, 'उस समय के बाद से (जब याचिका दायर की गई थी) आयात की स्थिति बदली है और उस अवधि के आंकड़े अव्यावहारिक हो गए हैं। चल रही जांच से पता चलता है कि जुलाई से दिसंबर 2017 तक की अवधि में चीन, ताइवान और मलेशिया से सेल और मॉड्यूल का आयात 33 से 45 प्रतिशत तक बढ़ा है।'  
एसोसिएशन ने कहा कि भारत में माल डंप करने के मकसद से कीमतों में भारी कटौती की गई, जिसकी वजह से आयात की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ी है। इस अवधि के दौरान कीमतों में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। आईएसएमए ने कहा, 'इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योग को बहुत नुकसान हुआ है, जिसके साथ न्याय नहीं हुआ है। 2017 के बाद की अवधि जांच में शामिल नहीं है।' 
आईएसएमए का कहना है कि वह जल्द ही नई याचिका के साथ संबंधित अधिकारियों से संपर्क करेगा। उसने बयान में कहा है, 'इसका मकसद है कि हमारी समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान हो।'
एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि करीब 80 प्रतिशत सोलर सेल और मॉड्यूल बाजार आयात से भरा हुआ है। याचिका में जून 2017 तक की जांच के आंकड़े हैं, जो एसोसिएशन की तीसरी कवायद थी कि सौर आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए, जिसकी भारतीय बाजार में बाढ़ आई हुई है। 
पहला मामला अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, मलेशिया और ताइवान के खिलाफ 2012 में दायर किया गया था। यह मामला दो साल चला जिसमें पाया गया कि सोलर सेल बाजार, संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उद्योग और यहां तक कि सीसा उद्योग भी सोलर पैनलों के आयात के खिलाफ संरक्षण चाहता है। डीजीएडी ने प्रति यूनिट शुलल्क 0.48 डॉलर से बढ़ाकर 0.81 डॉलर कर दिया, लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसे लागू नहीं किया और मई 2016 में यह शुल्क भी खत्म हो जाने दिया। 2014 में विनिर्माताओं ने वाणिज्य मंत्रालय के एंटी डंपिंग महानिदेशालय (डीजीएडी) और वित्त मंत्रालय के डॉयरेक्टर जनरल आफ सेफगाड्र्स (डीजीएस) के समक्ष याचिका दायर की। वाणिज्य मंत्रालय ने पाया कि अमेरिका से डंपिंग मार्जिन 50-60 प्रतिशत और चीन से 100-110 प्रतिशत है, जो सोलर सेल के बड़े वैश्विक निर्यातक हैं। लेकिन अगले साल की शुरुआत में ही तत्कालीन अक्षय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने घरेलू उद्योग को आश्वासन दिया कि उन्हें काम करने का अतिरिक्त मौका दिया जाएगा और उनसे मामला वापस लेने का अनुरोध किया।
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