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बैंकों के लिए हों एक समान उधारी मानक

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 07, 2018 10:52 PM IST

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्र्घन परिषद (जीजेईपीसी) ने वित्त मंत्रालय को सुझाव दिया है कि वह भविष्य में पीएनबी जैसे घोटालों की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सभी बैंकों को समान उधारी मानक अपनाने को कहे। वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे पत्र में जीजेईपीसी ने बैंकिंग संबंधी मौजूदा दिशा-निर्देशों में अंतर को दूर करने के लिए सभी बैंक प्रमुखों की बैठक किए जाने और एक ऐसी नई गाइडलाइन तैयार करने का अनुरोध किया है जो सभी बैंकों के लिए अमल में लाए जाने लायक हो।

बैंकों के उधारी मानकों में अंतर है। जहां कुछ बैंक जमानत के तौर पर हीरे की मांग करते हैं जबकि दूसरे बैंक ग्राहक कंपनियों की बैलेंस शीट के आधार पर ऋण स्वीकृत करते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि हीरा आभूषण कंपनियों पर राउंड ट्रिपिंग और बिक्री योग्य गहनों के अधिक बिल बनाने जैसे विभिन्न तरीकों के जरिये अक्सर अपनी बैलेंस शीट बढ़ाने का आरोप लगता है। 

इस घटनाक्रम से अवगत एक जानकार ने कहा, 'सभी बैंक अब विभिन्न प्रकार के उधारी मानकों पर अमल करते हैं। इस प्रक्रिया में कई वास्तविक कंपनियों को भी अपनी कार्यशील पूंजी जरूरत के लिए ऋण नहीं मिल पाता है। लेकिन कुछ कंपनियों को अनैतिक ढंग से बड़ी आसानी से ऋण मिल जाता है। लेकिन सभी बैंकों के लिए एक समान उधारी दिशा-निर्देशों से पूरी बैंकिंग प्रणाली में सख्त अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।'

जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष कोलिन शाह ने हालांकि वित्त मंत्रालय को भेजे पत्र का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्वीकार किया कि मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। शाह ने मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, 'पत्र का विवरण आगे चलकर सार्वजनिक किया जाएगा।'

115 अरब रुपये का पीएनबी (नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ा) घोटाला दो सप्ताह पहले उजागर होने के बाद जीजेईपीसी ने पूरी डायमंड वैल्यू चेन के लिए उधारी के प्रभारी बैंकिंग अधिकारियों के साथ बैठकें शुरू की हैं। हालांकि पीएनबी मामले में सवालों से घिरी दो कंपनियां भारत में पूरे हीरा आभूषण उद्योग का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। 

शाह का कहना है, 'लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) बैंकों से कार्यशील पूंजी जुटाने के लिए कोई प्रचलित प्रणाली नहीं है। ये एलओयू 115 अरब रुपये के पीएनबी-नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स घोटाले में संलिप्त लोगों का आविष्कार थे। हीरा व्यवसाय ऑर्डरों के क्रियान्वयन के लिए लाइंस ऑफ क्रेडिट (एलसी) का इस्तेमाल करता रहा है और अभी भी कर रहा है। इसलिए, पीएनबी-नीरव मोदी और गीतांजलि जेम्स घोटाला पूरे रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए बेहद असामान्य है। यह व्यवसाय कुछ महीनों में सामान्य हो जाएगा।' 

इस बीच, जीजेईपीसी ने नीरव मोदी के स्वामित्व वाली फायरस्टार डायमंड और मेहुल चोकसी के नेतृत्व वाली गीतांजलि जेम्स की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद ने 9 मार्च तक प्रतिक्रिया जानने के लिए इन दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बाद में परिषद इस मामले को सदस्यता रद्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जीजेईपीसी की डिसिप्लीनरी कमेटी के पास भेजेगी। इनकी सदस्यता रद्द करने से भारत और विदेश में इनके व्यवसाय सख्त हो जाएंगे। 

विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में नीरव मोदी के ग्राहकों ने ऑर्डर रद्द कराए हैं, उनके शोरूमों में प्रदर्शन के लिए भेजे अपने उत्पादों को वापस लिया है और मोदी की कंपनियों को उत्पादन लौटाए हैं जिससे वहां फायरस्टार डायमंड को चैप्टर 11 बैंगक्रप्ट्सी का आवेदन करने को बाध्य होना पड़ा है। जीजेईपीसी भारत में लगभग 43 अरब डॉलर के हीरा आभूषण व्यापार के 95 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है और उसके सदस्यों की संख्या लगभग 6500 है।
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