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जीएम सोया आयात रोकने का निर्देश पूरी तरह कारगर नहीं!

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Mar 08, 2018 11:17 PM IST

आनुवांशिक रूप से संशोधित (जीएम) सोयाबीन और सोयाबीन बीज के आयात को रोकने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) को दिए गए निर्देश का तब तक सीमित असर ही देखा जा सकता है जब तक कि इस तरह के नियंत्रण को प्लांट क्वारनटीन अथॉरिटी और सीमा शुल्क विभाग के समक्ष नहीं रखा जाता।

 

पिछले महीने जारी किए गए इस आदेश में जीएम सोयाबीन और सोयाबीन बीज के बगैर अनुमति के आयात को प्रतिबंधित किया गया है और इसका मकसद देश में जीएम सोयाबीन के अनियंत्रित आयात को नियंत्रित करना है।

अधिकारियों और उद्योग के सूत्रों का कहना है कि हालांकि सोयाबीन और सोया बीजों के आयात पर लगभग 45 फीसदी का भारी भरकम आयात शुल्क लगता है, इसलिए पिछले कुछ वर्षों से व्यापारियों ने अपनी खेप अफ्रीकी देशों, खासकर इथियोपिया और बेनिन जैसे देशों के जरिये भेजना शुरू किया है जिससे कि उन्हें शून्य शुल्क दर का लाभ मिल सके।

इस उद्योग की कुछ कंपनियों के अनुसार शुल्क से बचने के लिए व्यापारी जीएम सोयाबीन और सोया बीज अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात करते हैं और फिर इसे इथियोपिया या बेनिन के जरिये यह सुनिश्चित कर भेजते हैं कि खेपों पर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। 

भारत उन कुछ अफ्रीकी देशों से कई जिंसों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दे रखी है जो लीस्ट डेवलपमेंट कंट्रीज (एलडीसी) की श्रेणी में आते हैं। व्यापारी इसका फायदा उठाते हैं और शून्य शुल्क पर जीएम सोयाबीन भेजते हैं।  इस उद्योग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'भारत में एक वर्ष में लगभग 80,000 टन सोयाबीन और सोया बीजों का आयात इस तरीके के जरिये अवैध रूप से किया जाता है, लेकिन ऐसे आयात की मंजूरी से पहले डीजीएफटी से जीईएसी से अनुमति लेने को कहने भर से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।' 

अधिकारी ने कहा कि जब तक प्लांट क्वारनटीन को अधिकार नहीं दिए जाते और सीमा शुल्क अधिकारियों को इस मुद्दे पर अनुशासित नहीं बनाया जाता, तब तक अवैध व्यापार बरकरार रह सकता है। इस प्रतिबंध का सोया तेल आयात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि यह जीएम नियमों से पहले से ही अलग है। हालांकि इस उद्योग की कंपनियों का कहना है कि यदि जीएम सोयाबीन और सोया बीजों का अवैध आयात नहीं रोका जाता, तो इससे फसल चक्र और खाद्य शृंखला प्रभावित हो सकती है जो देश के लिए नुकसानदायक स्थिति होगी। 

भारत ने 2016-17 तेल विपणन वर्ष में लगभग 1.5 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात किया। तेल विपणन वर्ष अक्टूबर में समाप्त होता है। इसमें सोयाबीन तेल की भागीदारी लगभग 34 लाख टन रही।
कीवर्ड जीएम, सोयाबीन, डीजीएफटी,

  
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