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सोने पर कर कटौती का प्रस्ताव

राजेश भयानी | मुंबई Mar 12, 2018 11:14 PM IST

नीति आयोग की एक समिति ने सोने पर करों में भारी कटौती की सिफारिश की है और 2022 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस पीली धातु के योगदान को तीन प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए इसके प्रति अधिक उदार दृष्टिकोण पेश किया है। नीति आयोग के प्रमुख सलाहकार और पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव रतन पी वाटल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने 26 फरवरी को स्वर्ण नीति पर 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडियाज गोल्ड मार्केट' नामक अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपी है।

 

हालांकि, सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि इस पैनल ने सोने के कारोबार के सभी करों में तीव्र कटौती की सिफारिश की है, जिसमें वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) तथा आयात शुल्क भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में गैरकानूनी सोने का आयात सालाना 100-150 टन के बीच रहा है और तस्करी को रोकने के लिए कर ढांचे में समग्र कटौती की आवश्यकता है।

दिसंबर में एक मसौदा रिपोर्ट के बाद हाल ही में अंतिम रिपोर्ट पेश की गई है। इससे पहले समिति में चर्चाओं के कई दौर चले और कई विशेषज्ञों से मुलाकात की गई। करों में कटौती के अलावा रिपोर्ट के केंद्र बिंदु हैं - भारत में स्वर्ण खनन को बढ़ावा देना, कच्चे सोने की जिम्मेदाराना आपूर्ति और बढिय़ा डिलिवरी, भारतीय रिफाइनरीज द्वारा परिष्कृत सोने के लिए भारतीय मानक तैयार करना और सभी मसलों को हल करने के लिए किसी सिंगल विंडो एजेंसी की तरह वैधानिक शक्तियों वाले गोल्ड बोर्ड की स्थापना करना।

वित्त मंत्री पहले ही सोने की एक व्यापक नीति तैयार करने और गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज की स्थापना की घोषणा कर चुके हैं। इस समिति ने खनन से लेकर सोने के विपणन तक के लिए नीतिगत उपायों का प्रस्ताव दिया है। समिति यह भी चाहती है कि आभूषण कारोबार व्यवधान मुक्त हो, क्योंकि यह एक उत्पादक कारोबार है और 90-95 प्रतिशत मध्यम एवं लघु इकाइयों वाले इस उद्योगतंत्र में 61 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। इसमें यह भी कहा गया है कि सोना आयात का 16 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निवेश का अनुत्पादक भाग रहा है। समिति ने यह प्रस्ताव पेश किया है कि सरकार सोने को इस परिप्रेक्ष्य में देखे और आयात के बिना सोने के वैकल्पिक निवेश की पेशकश करे।

समिति ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के पुनरुद्धार और सभी बैंकों तथा उनकी शाखाओं से यह सेवा प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे ग्राहकों द्वारा जीएमएस के अंतर्गत सोने की न्यूनतम मात्रा को घटाकर पेशकश की जा सके।

समिति ने अंतरराष्ट्रीय पट्टा दरों केसाथ स्वर्ण धातु ऋण को जोड़कर बैंकों के लिए जीएमएस को आकर्षक बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। अब तक, कुछ बैंक विदेशी बैंकों से पट्टे पर सोना आयात करके वही सोना भारतीय जौहरियों को स्वर्ण धातु ऋण के रूप में उधार देते रहे हैं।
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