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बीटी कपास बीजों के खुदरा दाम घटे

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Mar 13, 2018 11:00 PM IST

किसानों को राहत

महाराष्ट्र में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद उठाया गया कदम, लाइसेंस शुल्क में 10 रुपये तक की कमी
केंद्र सरकार द्वारा गठित पैनल ने वर्ष 2016 में पहली बार बीटी कपास के दाम कम किए थे
450 ग्राम वाले पैकेट के लिए दाम 60 रुपये तक घटाकर 740 रुपये किए गए

किसानों को ध्यान में रखकर उठाए गए एक कदम के तहत केंद्र सरकार ने दो साल के अंतराल के बाद बीटी कपास बीजों के खुदरा दाम घटा दिए हैं। 450 ग्राम वाले पैकेट के लिए दाम 60 रुपये तक घटाकर 740 रुपये कर दिए गए हैं। इसमें 2018-19 के फसल सीजन के लिए जीन संवर्धित (बीटी) कपास बीजों की 'ट्रेट वैल्यू' (लाइसेंस शुल्क) भी शामिल है, जिसमें 10 रुपये तक की कटौती की गई है। इस बारे में एक औपचारिक अधिसूचना सोमवार देर रात जारी की गई। ऋण माफी और फसल बर्बादी की क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर मुंबई में महाराष्ट्र के हजारों किसानों के विरोध प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद यह आदेश आया है।

बीटी कपास के मौजूदा दाम प्रति 450 ग्राम पैकेट के लिए 800 रुपये हैं, जिसमें 49 रुपये ट्रेट शुल्क (कर समेत) के होते हैं। ट्रेट शुल्क वह होता है जिसका भुगतान बीज कंपनियों को लाइसेंस धारकों को कराना पड़ता है। इस मामले में यह देश में वैश्विक दिग्गज मोनसैंटों की संयुक्त उद्यम साझेदार माहिको मोनसैंटो बायोटेक (एमएमबीएल) है। कपास प्रमुख रूप से महाराष्ट्र में उगाई जाती है और इस साल कीट के हमले की वजह से उत्पादन कम रहा है।

बीटी कपास बीजों के खुदरा दामों में इस गिरावट से बीज कंपनियों के लाभ पर असर पड़ सकता है। इन कंपनियों ने केंद्र को कीमतें बढ़ाने के लिए लिखा था अन्यथा 2018-19 में उनके लिए किसानों को कपास के बीज की आपूर्ति करने में मुश्किल हो जाएगी।

दिसंबर 2015 के कपास बीज मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत केंद्र द्वारा गठित एक पैनल ने बीटी कपास बीज के दाम पहली बार 2016 में कम किए थे। दामों को 830-1,030 रुपये के स्तर से घटाया गया था और प्रति पैकेट 163 रुपये की ट्रेट वैल्यू में करीब 70 प्रतिशत की कमी की गई थी। मई 2016 में जारी किए गए दिशा-निर्देश में ट्रैट वैल्यू को बीज के बिक्री मूल्य के 10 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया था और इसके बाद इसे समय-समय पर कम किया जाता रहा। बहुराष्टरीय कंपनियों ने इसकी काफी आलोचना की थी। मोनसैंटों ने कहा कि वह देश में अपने पूरे कारोबार की पुन:समीक्षा करेगी, यह उसके लिए सबसे बड़ा झटका है।

मोनसैंटों ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की थी। एमएमबीएल ने 2002 के बाद से 50 विभिन्न घरेलू कंपनियों को बीटी कपास बीज प्रौद्योगिकी का उप-लाइसेंस जारी किया था। इसने बीजी-1 प्रौद्योगिकी का सबसे पहला उप-लाइसेंस जारी किया था, जिसका पेटेंट 2006 में खत्म हुआ था। अब यह बीजी-2 का उप-लाइसेंस देती है। इस प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से उत्पादित बीजों का भारतीय कपास बाजार में 95 प्रतिशत हिस्सा है। तीसरी प्रौद्योगिकी बीजी-3 पर अभी काम चल रहा है लेकिन उसे अभी तक व्यावसायिक प्रयोग की स्वीकृति नहीं मिली है। घरेलू बीज कंपनियों का दावा है कि एमएमबीएल ने ट्रेट वैल्यू के रूप में 5.3 अरब रुपये सालाना इक_ïा किया है और 2002 के बाद से लाइसेंस शुल्क के रूप में 70 अरब रुपया ले चुकी है। भारतीय बीटी बीज बाजार सालाना कम से कम 35 अरब रुपये मूल्य का है।
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