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10 प्रतिशत घट सकता है कपास उत्पादन

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 14, 2018 11:21 PM IST

भारत का कपास उत्पादन वर्ष 2017-18 के लिए फसल-पूर्व 3.77 करोड़ गांठ (प्रत्येक गांठ =170 किलोग्राम) कपास की पैदावार के अनुमान की तुलना में 10 प्रतिशत तक घट सकता है। इसकी मुख्य वजह प्रमुख उत्पादक राज्यों में पिंक बॉलवॉर्म के हमले को माना जा रहा है। 

 

बुधवार को भारतीय टेक्सटाइल उद्योग संघ (सीआईटीआई) द्वारा आयोजित 9वीं एशियन टेक्सटाइल्स कॉन्फ्रेंस में एकत्रित हुए उद्योग दिग्गजों ने पूरे महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस कीट (पिंक बॉलवॉर्म) के हमले की वजह से इस साल कपास उत्पादन पर व्यापक प्रभाव पडऩे का अनुमान जताया। इसके साथ, भारत का कपास उत्पादन मौजूदा फसल सीजन के लिए लगभग 3.45 करोड़ टन पर सपाट बने रहने की संभावना है, जैसा कि पूर्ववर्ती सीजन 2016-17 में दर्ज किया गया था। 

कुल कपास उत्पादन में कमी ने सरकार को बैसीलियस थुरिंजिंएसिस (बीटी) बीज पर अपनी निर्भरता पर पुनर्विचार के लिए प्रोत्साहित किया है। किसानों को कपास फसल पर संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (सीआईसीआर) ने मीडियम और लॉन्ग स्टैपल कपास बीज की किस्म विकसित की है जो अगले सीजन में बिक्री के लिए तैयार है।

उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा, 'हम इस साल कपास उत्पादन में अपने 3.8 करोड़ गांठ के शुरुआती अनुमान की तुलना में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी की आशंका जता रहे हैं, क्योंकि कई कपास उत्पादक राज्यों में पिंक बॉलवॉर्म का संक्रमण देखा गया है।'

इस साल कपास फसल पर इस कीट के हमले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय कपास संघ (सीएआई) ने दो महीने में दूसरी बार अपना उत्पादन अनुमान घटाकर 3.62 करोड़ गांठ कर दिया है जबकि इस सीजन के शुरू में यह अनुमान 3.75 करोड़ गांठ था। इसका मतलब है कि सीएआई चालू वर्ष में अपने कपास उत्पादन अनुमान में 3.5 फीसदी तक की कमी पहले ही कर चुका है। 

सीएआई के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने कहा, 'कपास उत्पान अनुमान मंडियों में मौजूदा स्थिति (आवक समेत) और किसानों के पास इस फसल की अनुमानित उपलब्धता पर आधारित है। हालांकि यदि मंडियों में आवक और किसानों के पास फसल की उपलब्धता में कमी आती है तो हम इस अनुमान में और कटौती कर सकते हैं।'

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में 42 लाख हेक्टेयर के पूरे रकबे पर पिंक बॉलवॉर्म हमले का प्रभाव पडऩे की वजह से कपास उत्पादन में कम से कम 17 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान जताया है। इस कीट के हमले की वजह से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी कपास की फसल प्रभावित होने की खबरें आई हैं। 

महाराष्ट्र, सरकार में कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने किसानों को इस साल के शुरू में फसल की प्रक्रिया पूरी करने और सामान्य की तुलना में लंबे समय तक खेत खाली रखने की सलाह दी जिससे कि यह कीट गर्मी के मौसम में प्राकृतिक तौर पर मर जाए। पिछले साल कपास फसल जल्दबाजी में बोई गई थी जिससे इस कीट को कपास खेतों में पूरी तरह फैलने का मौका मिल गया।' कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सीएबी) हालांकि टेक्सटाइल आयुक्त कविता गुप्ता के मार्गदर्शन में अगले कुछ सप्ताह में सभी हितधारकों की एक बैठक आयोजित करने के लिए तैयार है जिससे कि 2017-18 के लिए निर्णायक कपास उत्पादन के आंकड़े का अनुमान लगाया जा सके। सीएबी ने दिसंबर 2017 में आयोजित अपनी बैठक में महाराष्ट्र में कीट के हमले की वजह से औसत कपास पैदावार में 13 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया था। 

गनात्रा के अनुसार, ताजा कीमत वृद्घि की वजह से वैश्विक बाजारों में भारत का कपास निर्यात बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया है। इसे देखते हुए भारत का कपास निर्यात पिछले साल के 67 लाख गांठों के स्तर को पार कर सकता है।
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