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गर्मी से उबलेंगे सब्जियों के दाम

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Mar 14, 2018 10:50 PM IST

इस साल अधिक गर्मी पड़ने की आशंका

सर्दियों में बारिश नहीं होने और मॉनसून पूर्व फुहारें नदारद रहने से चढ़ा पारा
तापमान बढ़ने के साथ ही पेय जल और मवेशी चारे का पैदा हो सकता है संकट
हालांकि तापमान बढ़ने के बावजूद गेहूं, सरसों और चने की फसलों पर नहीं होगा खास असर

इस साल चिलचिलाती गर्मी कुछ ज्यादा ही सता सकती है। गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और मौसम पूर्वानुमानों और दिन के तापमान के मद्देनजर इस साल अधिक गर्मी  पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। देश के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी से पेय जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, वहीं मवेशी को चारे के भी लाले पड़ सकते हैं। हालांकि तापमान में अचनाक वृद्धि से खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों और चने की फसलों पर खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है। इनमें सरसों और चने की फसलों की कटाई मोटे तौर पर हो चुकी है, लेकिन चिलचिलाती गर्मी से सब्जी आपूर्ति प्रभावित हो सकती हैं और कीमतें उबल सकती हैं। 

मौसम संबंधी आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और देश के उत्तरी हिस्से के दूसरे शहरों में पारा 30 डिग्री का स्तर पार कर गया है, जो ऐतिहासिक स्तर से 3 से 7 प्रतिशत अधिक है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मार्च-मई के बीच सभी उप क्षेत्रों (सब-डिविजन) में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान जताया है। विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों को अधिक गर्मी झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।  

मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि इस साल गर्म हवाएं चलने की आशंका अधिक है, खासकर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य भाग में हालत बदतर रह सकती है। इस बार सर्दियों में बारिश नहीं होने और मॉनसून पूर्व फुहारों के नदारद रहने से मौसम गर्म और शुष्क रह सकता है। इस बीच, अरब सागर के ऊपर हलचल तेज है, जो अगले कुछ दिनों में चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकती है। हालांकि इसका असर तमिलनाडु, केरल और लक्षद्वीप के तटीय इलाकों तक सीमित रह सकता है।  

देश के उत्तरी हिस्से में कोई बड़ी हलचल नहीं हो सकती है, जिससे ऊंचे तापमान से थोड़ी राहत मिलेगी। जनवरी और फरवरी में बारिश में कमी 60 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि 1 मार्च से बारिश 30 प्रतिशत तक कम हुई है। उत्तर और मध्य भारत को बारिश में कमी का खमियाजा उठाना पड़ा है। अनुमानों के अनुसार इस साल भारत में मॉनसून पूर्व बारिश कम रह सकती है। 

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी संस्था स्काईमेट में मुख्य मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत कहते हैं, 'अप्रैल में तेलंगाना, विदर्भ, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक के सुदूर उत्तरी हिस्से और ओडिशा के कुछ हिस्से में गर्म हवाएं चलनी शुरू हो सकती हैं। इन इलाकों में तापमान 40 डिग्री से अधिक हो सकता है।'

मौसम विभाग ने पिछले महीने कहा था कि मार्च और मई के बीच गर्म हवाओं के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक हो सकता है। जिन क्षेत्रों में गर्म हवाओं की सबसे अधिक असर रहता है, उनमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, मराठवाड़ा, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र और तटीय आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

करनाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट ऐंड बार्ली रिसर्च के निदेशक जी पी सिंह ने कहा, 'कुछ हिस्सों में दिन का तापमान बढ़ गया है, लेकिन रात का तापमान अब भी अनुकूल हैं। इसका मतलब है कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेतें में खड़ी गेहूं की फसल पर खास असर नहीं होगा।' सिंह ने कहा कि दूसरे गेहूं उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में गेहूं की फसल पकने की हालत में है। इन इलाकों में तापमान में अचानक तेजी आई है। 

सिंह ने कहा, 'कुल मिलाकर देश में गेहूं उत्पादन शुरुआती अनुमान 9.6-9.7 करोड़ टन का अनुमान पार कर सकता है। रकबे में मामूली गिरावट से 2018-19 में उत्पादन में कमी आने की आशंका नहीं है। हालांकि गर्मी की मार अधिक समय तक रहने से पेय जल और बिजली की समस्या पैदा हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में हालत अधिक खराब होगी, जहां जलाशयों में पानी का स्तर कम हो गया है और भूमिगत जल की मात्रा अपर्याप्त हैं।'

राष्ट्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार 8 मार्च तक गुजरात की जीवन रेखा माने जाने वाले सरदार सरोवर बांध में पानी लगभग सूख चुका था। गुजरात और महाराष्ट्र के 27 जलाशयों में जल स्तर पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7 प्रतिशत तक कम हो गया था। 
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