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परिष्कृत सोने की बढ़ेगी आपूर्ति

दिलीप कुमार झा | मुंबई Mar 15, 2018 10:46 PM IST

सोने की चमक

प्रस्तावित स्वर्ण नीति से स्वर्ण रिफाइनरियों को मिलेगा प्रोत्साहन
80 फीसदी हो सकती है आपूर्ति

सरकार की प्रस्तावित स्वर्ण नीति से देश में भारतीय रिफाइनरियों से परिष्कृत सोने की आपूर्ति में भारी इजाफा होगा। इस नीति को नीति आयोग के पैनल की सिफारिशों के बाद अंतिम रूप दिया जा रहा है। वैश्विक स्वर्ण खनिकों की संस्था विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि कैलेंडर वर्ष 2017 में भारत का कुल डोर (अपरिष्कृत सोना) आयात 245.7 टन रहा, जो उससे पिछले वर्ष 141.9 टन रहा था। कैलेंडर वर्ष 2017 में स्थानीय रिफाइनरियों में पुराने आभूषणों को पिघलाकर 78.4 टन सोना बनाया गया, जो 2016 में 79.5 टन था। अन्य स्रोतों से 8.8 टन सोना प्राप्त हुआ, जो 2016 में 9.9 टन था। 

इंडिया बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित 5वें भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एकत्रित विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि नीति से पूरी आभूषण मूल्य शृंखला में बड़े बदलावों का रास्ता साफ होगा। एमएमटीसी पैंप के पूर्व प्रबंध निदेशक राजेश खोसला ने कहा, 'नई नीति से स्थानीय रिफाइनरियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। अगले कुछ वर्षों में स्थानीय रिफाइनरियों से सोने की आपूर्ति बढ़कर 80 फीसदी हो सकती है, जो इस समय 40 फीसदी है।' एमएमटीसी पैंप देश की एकमात्र ऐसी रिफाइनरी है, जो भारत में एलबीएमए (लंदन बुलियन मार्केट्स एसोसिएशन) से मान्यता प्राप्त सोने का उत्पादन करती है। 

उद्योग के भागीदारों का कहना है कि सोने का नियमन बहुत से मंत्रालय और संस्थाएं करती हैं। वाणिज्य मंत्रालय आभूषणों के निर्यात पर नीति बनाता है, जबकि वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सोने का आयात बढ़ने पर चालू खाते के घाटे पर अंकुश के लिए नीति बनाते हैं। 

रत्नाभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे ने कहा, 'पूरे उद्योग के लिए एक नियामक बनाना बहुत जरूरी है। इससे स्वर्ण एवं आभूषण उद्योग को मंजूरियों के लिए बहुत से मंत्रालयों में दस्तावेज नहीं भेजने पड़ेंगे। अभी सोने का नियमन कई नियामक करते हैं, जिनके अलग-अलग मकसद हैं। पूरे उद्योग की सभी दिक्कतों को दूर करने और सभी हितधारकों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने के लिए एक नियामक होना जरूरी है।'

केंद्रीय वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव मनोज द्विवेदी ने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए एक स्वर्ण बोर्ड बनाया जा रहा है। दरअसल यह घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल के केंद्रीय बजट में की थी। सूत्रों ने कहा कि बोर्ड को वैधानिक शक्तियां दी जा सकती हैं, जिसमें स्वर्ण उद्योग के सभी हितधारकों और संबंधित सरकारी विभागों एवं नियामकों का प्रतिनिधित्व होगा। हालांकि द्विवेदी ने यह नहीं बताया कि यह बोर्ड कब गठित होगा। 

द्विवेदी ने कहा, 'हमने मंत्री की घोषणा के मुताबिक बोर्ड के गठन पर काम शुरू कर दिया है। यह जरूरी है कि उद्योग के सभी भागीदार संगठित हों और सरकार सभी की सुनवाई कर रही है।'  प्रस्तावित नीति का मकसद सोने और आभूषणों के खुदरा कारोबार, हॉलमार्किंग और स्वर्ण ऋण में पारदर्शिता के मसलों को हल करना है।
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