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वैश्विक दाम बढऩे से भारत का कपास निर्यात बढ़ा

रॉयटर्स |  Mar 15, 2018 10:48 PM IST

वैश्विक बाजारों में कपास के दाम चार वर्ष के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने से भारत का कपास निर्यात तेजी पकड़ रहा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले तीन सप्ताह में व्यापारियों ने 10 लाख कपास की गांठों की खरीद के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। एक भारतीय गांठ 170 किलोग्राम की होती है। भारत से होने वाली आपूर्ति का असर वैश्विक दामों पर पड़ सकता है और एशिया में आयात करने वाले देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और अमेरिका आदि को प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। 

जयदीप कॉटन फाइबर लिमिटेड के चिराग पटेल कहते हैं, 'कम कीमत होने के कारण बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान बड़ी मात्रा में हमसे खरीदारी कर रहे हैं। हम दूसरे देशों के मुकाबले अधिक लाभ में हैं।' बांग्लादेश और वियतनाम में भारत से आयातित कपास की कीमत माल-भाड़े की लागत सहित लगभग 82-85 सेंट प्रति पॉन्ड है, जबकि अमेरिका और ब्राजील से यही कीमत 90 सेंट से अधिक हो जाती है। भारतीय कपास परिषद (सीआईए) के अध्यक्ष अतुल गनात्रा कहते हैं, 'वर्तमान कीमतों पर निर्यात की मांग लगातार बनी हुई है।'  

वह बताते हैं कि 30 सितंबर को समाप्त होने वाले वर्तमान सीजन में भारत का कपास निर्यात पहले के अनुमान से पांच गुना अधिक लगभग 60 लाख गांठों से अधिक हो सकता है। वैश्विक व्यापार फर्म से जुड़े मुंबई के एक कारोबारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, 'जनवरी में हमें लगता था कि भारत 50 लाख कपास गांठों तक का निर्यात कर सकता है, लेकिन अब अनुमान है कि यह बढ़कर 65 लाख गांठें हो जाएगा।'

उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष अब तक भारतीय कारोबारियों ने 47 लाख कपास की गांठों के निर्यात अनुबंध कर लिए हैं, जिसमें से लगभग 35 लाख की आपूर्ति की जा चुकी है। कपड़ा आयुक्त कार्यालय द्वारा प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि पिछले वर्ष भारत का कपास निर्यात 58.2 लाख गांठें रहा था। डीलर ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट से भी निर्यात से होने वाले लाभ में बढ़ोतरी हुई है। कुछ महीने पहले से ही निर्यात में तेजी आनी शुरू हुई है। इससे पहले कपास की वैश्विक कीमतें कम होने से भारतीय कारोबारियों को मामूली लाभ ही हो रहा था। 

जयदीप कॉटन के पटेल ने बताया कि पाकिस्तान से मांग तेज हुई है और वह इस वर्ष में 8 लाख तक कपास गांठों का आयात कर सकता है। पाकिस्तान ने जनवरी में ही भारत से कपास आयात पुन: चालू किया है और उससे पहले की तिमाही में भारत से कपास खरीद नहीं की थी। गनात्रा ने बताया कि महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में पिंक वॉलवर्म के प्रकोप के कारण भारत का कपास उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले 1.4 प्रतिशत कम होकर 2017-18 में 3.62 करोड़ गांठें रह सकता है। सीआईए का अनुमान है कि अधिक निर्यात और घरेलू उत्पादन में कमी से 2017-18 के सीजन की समाप्ति पर भारत का कपास भंडारण भी 14 वर्ष में सबसे कम होकर 22 लाख टन तक हो सकता है।
कीवर्ड कपास, भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अमेरिका,

  
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