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दार्जिलिंग चाय फिर ताजा करने की तैयारी

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Mar 18, 2018 08:56 PM IST

चाय बागान

पिछले साल गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की हड़ताल से लगभग पूरे साल की फसल हो गई थी चौपट
वैश्विक बाजारों में दार्जिलिंग चाय की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर बनी आशंका, चाय के प्रति फिर से विश्वास बना रहा बंगाल
ब्रांडिंग और विपणन प्रोत्साहन के जरिये इस चाय को फिर से मैदान में लाने की हो रही तैयारी
वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त भौगोलिक संकेतक और लोगो प्राप्त करने वाला भारत का पहला उत्पाद है दार्जिलिंग चाय
दार्जिलिंग चाय के तकरीबन 30 ब्रांड बनाने का इरादा है राज्य सरकार का

दार्जिलिंग की पहाडिय़ों में चाय उत्पादकों द्वारा प्रमुख उत्पादन सीजन गंवाने के बाद 'दार्जिलिंग चाय' ब्रांड पर वैश्विक रूप से संकट मंडरा रहा है। वैश्विक बाजारों में इस चाय की उपलब्धता गंभीर रूप से कम हो रही है। इसी कारण पश्चिम बंगाल सरकार इस ब्रांड के प्रति वैश्विक ग्राहकों का विश्वास वापस लाने में मदद के लिए विपणन और प्रोत्साहन की तैयारी में जुटी है। पिछले साल गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अलग राज्य की मांग करते हुए हड़ताल का आह्वïान किया था। यह 100 दिनों से अधिक चली थी। इसके बाद दार्जिलिंग की पहाडिय़ों में चाय का संपूर्ण उत्पादन रुक गया। चाय उत्पादकों ने आरोप लगाया है कि दार्जिलिंग चाय की ऐसी आकस्मिक अनुपलब्धता ने वैश्विक खरीदारों के बीच भविष्य में दार्जिलिंग चाय ब्रांड की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस कारण उत्पादन शुरू होने के बाद नए सिरे से विपणन प्रयासों की आवश्यकता है।

हालांकि राज्य सरकार ने अभी दार्जिलिंग चाय के ब्रांडिंग प्रोत्साहन की सटीक प्रकृति पर फैसला नहीं किया है, लेकिन पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम की प्रबंध निदेशक वंदना यादव ने कहा कि राज्य सरकार दार्जिलिंग चाय के तकरीबन 30 ब्रांड बनाने का इरादा रखती है जो इस उद्योग के झंडाबरदार बनेंगे। वह उद्योग की संस्था सीआईआई द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम से इतर बोल रही थीं।

दरअसल, दार्जिलिंग चाय भारत का पहला ऐसा उत्पाद है जिसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग और लोगो प्राप्त है। चाय के इस ब्रांड को जीआई टैग और लोगो के बिना नहीं बेचा जा सकता है। इसी प्रकार, दार्जिलिंग में उत्पादित चाय के अलावा किसी अन्य मिश्रण को 'दार्जिलिंग चाय' के नाम पर बेचा जाना अवैध है। वंदना ने कहा कि चूंकि इसे पहले से ही जीआई टैग प्राप्त है, इसलिए इस ब्योरे पर काम किया जा रहा है कि राज्य सरकार ब्रांडिंग की पहल में कैसे मदद कर सकती है।

इसके अलावा, राज्य सरकार उद्योग को बेहतर दाम और बाजार खोजने में भी मदद करेगी। जर्मनी, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश दार्जिलिंग चाय के प्रमुख बाजार हैं। सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकार उन चुनिंदा बागानों की पहचान कर सकती है जो अच्छी वैश्विक मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चाय का उत्पादन करते हैं और सरकार ऐसे बागानों की उपज की ब्रांडिंग में मदद कर सकती है। हालांकि उद्योग के अधिकारी चाहते हैं कि राज्य सरकार पहले उनकी वित्तीय मदद करे। उन्होंने अनुदान मांगा है। दार्जिलिंग के एक चाय बागान मालिक ने कहा कि बागान बंद रहे थे और हमने बिना किसी कसूर के लगभग पूरे साल की फसल गंवा दी थी। अब हमें वेतन, बोनस और अन्य भुगतान करने है तथा केंद्र व राज्य सरकार से अपनी मदद की दरकार है।

फिर भी, उद्योग का मानना ​​है कि इस साल दोबारा मैदान में उतरने और खरीदारों का भरोसा हासिल करने के लिए वित्तीय मदद के अलावा ब्रांडिंग और विपणन प्रोत्साहन की भी आवश्यक है। यह भी माना जाता है कि अगर राज्य सरकार वैश्विक खरीदार आधार के साथ-साथ मध्यस्थ बिक्री मूल्य बढ़ाने में मदद कर सकती है, तो इससे अंतरराष्टï्रीय बाजार में दार्जिलिंग चाय को बेहतर दाम मिलेंगे।
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