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हाजिर कारोबार में उतरेगा एमसीएक्स

राजेश भयानी | मुंबई Mar 20, 2018 10:15 PM IST

भारत का धातुओं और ऊर्जा का सबसे बड़ा जिंस डेरिवेटिव एक्सचेंज अब हाजिर जिंस कारोबार भी शुरू करने जा रहा है। एक्सचेंज ने धातुओं एवं ऊर्जा के डेरिवेटिव अनुबंधों की अपनी ताकत हाजिर बाजार में भी दिखाने की योजना बनाई है। बाजार नियामक सेबी के इक्विटी और जिंस एक्सचेंजों को एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र में उतरने की मंजूरी देने के बाद एमसीएक्स का यह कदम बहुत अहम होगा।  देश का सबसे पुराना इक्विटी एक्सचेंज बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पहले ही जिंस डेरिवेटिव और सोने का हाजिर एक्सचेंज शुरू करने अपनी योजना की घोषणा कर चुका है। एमसीएक्स के नियम उसे विनियमित क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार करने की मंजूरी नहीं देते हैं। हालांकि वित्त मंत्रालय हाजिर और डेरिवेटिव बाजारों में तालमेल कायम करने के लिए विभिन्न उपायों के बारे में विचार कर रहा है ताकि किसानों और औद्योगिक इकाइयों को अपने जिंस जोखिम को हेज करने में मदद मिल सके। 
 
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है कि हाजिर और डेरिवेटिव बाजारों में तालमेल कैसे बैठाया जाए। सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने इस मसले पर चर्चा के लिए आगामी शनिवार को सभी हितधारकों की एक बैठक भी बुलाई है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी कि हाजिर बाजार का नियमन कैसे हो।  एमसीएक्स के एमडी और सीईओ मृगांक परांजपे ने कहा, 'हम इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि हाजिर बाजारों के नियम कैसे बनाए जाते हैं। जिंसों के लिए बहुत से खंड नियामक होने की संभावना है, लेकिन कुशल परिचालन के लिए हाजिर कारोबार को एक एक्सचेंज के तहत मंजूरी दी जानी चाहिए  और संबंधित खंड नियामकों से भी जिंसवार मंजूरी ली जानी चाहिए।'
 
उन्होंने कहा कि नियमनों को लेकर स्थिति साफ होने के बाद एक्सचेंज हाजिर एक्सचेंज शुरू कर अपना विस्तार करने को तैयार है। नीति आयोग के समूह ने कृषि और गैर-कृषि बाजारों में तालमेल के लिए रिपोर्ट तैयार करने की खातिर दो उप समूह गठित किए हैं। एक महीने पहले उप समूहों के सुझाव प्राप्त करने के बाद समिति ने वित्त मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सरकार भी इस रिपोर्ट पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में यह सिफारिश भी होगी कि वायदा अनुबंधों के निपटान में हाजिर बाजार कीमतों का कैसे इस्तेमाल किया जाए क्योंकि ज्यादातर जिंसों में पारदर्शी हाजिर कीमतें उपलब्ध नहीं हैं। 
 
एक अन्य मसला यह  है कि अगर नियमित एक्सचेंज इस क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो हाजिर बाजारों को कैसे नियमित करें। इस पहलू पर व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है क्योंकि बहुचर्चित स्वर्ण हाजिर  एक्सचेंज के लिए नियामक गोल्ड बोर्ड को बनाए जाने की संभावना है। गैस के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) है, जो गैस-ऊर्जा हाजिर एक्सचेंज का नियमन कर सकता है। अगर बिजली क्षेत्र में अन्य एक्सचेंज प्रवेश करते हैं तो केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग बिजली में हाजिर कारोबार को नियमित कर सकता है। हालांकि धातुओं के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। कृषि राज्यों का विषय है, इसलिए कृषि जिंस एक्सचेंज को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होगी।  इस बीच एमसीएक्स धातुओं में डिलिवरी आधारित निपटान के बारे में भी विचार कर रहा है। यह ऐसा ही एक अनुबंध पीतल धातुओं में शुरू करेगा, जिसके प्रमुख कारोबारी केंद्र गुजरात के सौराष्ट्र में जामनगर-राजकोट और उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद है। एमसीएक्स शुरू में डिलिवरी का स्थान जामनगर रखेगा। हाजिर कीमतें मत से एकत्रित होंगी। 
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