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कपास का रकबा घटेगा 12 फीसदी

रॉयटर्स | मुंबई Mar 20, 2018 10:17 PM IST

विश्व में सबसे अधिक कपास उत्पादन करने वाले देश भारत में 2018-19 फसल सत्र के लिए कपास बुआई का रकबा 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इस बार पिंक बॉलवर्म के प्रकोप से फसल बरबाद होने के कारण किसानों की आय में कमी हुई है और इस बार किसान कोई दूसरी फसल का चयन कर सकते हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। बुआई रकबे में कमी से भारत का निर्यात भी घट सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर कपास की कीमतों में और तेजी आएगी। इस माह कपास की वैश्विक कीमतों ने जून 2014 के बाद अपना सर्वोच्च स्तर छुआ था।
 
भारतीय कपास संघ (सीएआई) के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने कहा, 'पिंक बॉलवर्म के हमले के कारण इस बार महाराष्ट्र और कर्नाटक में बुआई रकबे में कमी देखी जा रही है। इन राज्यों के बहुत से किसान सोयाबीन जैसी दूसरी फसलों की ओर रूख कर सकते हैं।' कपास उत्पादन के प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र और तेलंगाना में इस प्रकोप के कारण फसल उत्पादन में कमी आई और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से किसानों की लागत भी बढ़ गई। पिंक बॉलवर्म कपास के पौधे से फाइबर और बीज को खा जाता है, जिससे फसल खराब हो जाती है। 
 
गनात्रा का अनुमान है कि अक्टूबर से शुरू होने वाले फसल सत्र में 2018-19 के लिए बुआई रकबा कम होकर 108 लाख हेक्टेयर हो सकता है, जो वर्तमान सत्र में 122.6 लाख हेक्टेयर है। कपास उत्पादन के लिए काफी मात्रा में नमी की आवश्यकता होती है और अधिकांश किसान जून में मॉनसून के आने पर इसकी बुआई शुरू करते हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई सुविधा होती है, वे मई में कपास की बुआई शुरू कर देते हैं।  मुंबई से 720 किलोमीटर दूर वर्धा के एक किसान सुधाकर पंवार ने कहा, 'मैंने पिंक बॉलवर्म की रोकथाम के लिए 35,000 रुपये खर्च किए, लेकिन फिर भी वह बढ़ता गया। इस बार फसल उत्पादन 400 किलो प्रति एकड़ रहा, जो पिछले वर्ष 900 किलो प्रति एकड़ था।' पंवार अगले सीजन में कपास का बुआई रकबा 5 हेक्टेयर से घटाकर 2 हेक्टेयर करने की योजना बना रहे हैं और बाकी बचे क्षेत्र में सोयाबीन की फसल करेंगें। 
 
भारतीय किसानों ने जीन-संवर्धित (जीएम) बीजों (बीटी-कॉटन) का प्रयोग किया था, लेकिन इसके बाद भी फसल में कीट का प्रकोप हुआ। तकनीकी बदलाव ने भारत को अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा कपास निर्यातक देश बना दिया है। हालांकि, पिंक बॉलवर्म ने इस तकनीक को लेकर प्रतिरोधक क्षमता हासिल कर ली है। भारत के वस्त्र आयुक्त कविता गुप्ता ने कहा, 'हम किसानों को बीटी कपास के स्थान पर हाइब्रिड बीजों के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं, जिससे नुकसान को कम से कम किया जा सके।'
 
सरकार ने निर्णय लिया है कि भारतीय बीज कंपनियों द्वारा जीएम कपास बीजों के लिए मोनसैंटो को दी जाने वाली रॉयल्टी में 20.4 प्रतिशत की कमी की जाएगी। मौसम विभाग अगले महीने जून-सितंबर सत्र के लिए मॉनसून का अनुमान जारी करेगा। एक निजी मानसून करने वाला संस्था ने पिछले सप्ताह बताया कि 2018 में मॉनसून सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है। जयदीप कॉटन फाइबर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी चिराग पटेल कहते हैं कि कपास मुख्यत: बारिश वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है और इसके उत्पादन पर मॉनसून का काफी असर पड़ेगा। 
कीवर्ड cotton, joot,

  
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