होम » Commodities
«वापस

इस्पात पर डंपिंग रोधी शुल्क बढ़ाने की मांग

अदिति दिवेकर | मुंबई Mar 20, 2018 10:17 PM IST

कच्चे माल की लागत में हो चुकी है काफी बढ़ोतरी

देसी प्राथमिक इस्पात उत्पादक हॉट और कोल्ड रोल्ड इस्पात उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क की मध्यावधि समीक्षा के लिए सरकार से संपर्क करेंगे। इसकी वजह यह है कि जब अगस्त, 2016 में यह शुल्क लगाया गया था, उसके बाद कच्चे माल की कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है। डंपिंग रोधी शुल्क की समीक्षा के एक याची ने आज बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'अगस्त 2016 से मार्च 2018 के बीच कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी बहुत अधिक रही है और भारत को इस अंतर को संतुलित करने के लिए लागत में बढ़ोतरी के अनुपात में शुल्क बढ़ाना चाहिए।'

एस्सार स्टील, सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और सज्जन जिंदल की अगुआई वाली जेएसडब्ल्यू स्टील ने मिलकर सरकार के पास एक दरख्वास्त दी है। इसमें कोरिया, जापान, चीन, ब्राजील, रूस और यूक्रेन जैसे पड़ोसी देशों से भारत में आ रहे सस्ते इस्पात से राहत दिलाने का आग्रह किया गया है। इस आवेदन का भूषण स्टील और टाटा स्टील ने भी समर्थन किया है।

याची ने कहा, 'हम अभी औपचारिक रूप से सरकार के पास नहीं गए हैं। इसकी प्रक्रिया यह है कि हमें जरूरी आंकड़े मुहैया कराने होंगे और हम अपने स्तर पर यह काम कर रहे हैं।' इन याचियों ने डंपिंग रोधी शुल्क के लिए सरकार से 2015 में संपर्क किया था। उन्होंने जुलाई-दिसंबर 2015 के आंकड़े मुहैया कराए थे। अगस्त, 2016 में जारी डंपिंग रोधी अधिसूचना पांच साल की अवधि के लिए है। यह शुल्क 47 उत्पादों पर लगाया गया है और इसकी दर 478 डॉलर प्रति टन से लेकर 561 डॉलर प्रति टन तक है। 

याचियों ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने आयातित इस्पात पर शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। इससे दक्षिण कोरिया जैसे देशों से भारत में ज्यादा डंपिंग का जोखिम बढ़ा है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध से उसके कारोबारी साझेदार प्रभावित होंगे।

जेएसडब्ल्यू स्टील के निदेशक (वाणिज्य) जयंत आचार्य ने कहा, 'हमारा डंपिंग रोधी शुल्क आज बहुत कम है। भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमें बराबरी का मौका मिले और कोई डंपिंग न हो। भारत का अमेरिका को इस्पात निर्यात बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन अहम बात यह है कि हमें एशिया से अमेरिका को होने वाले इस्पात के निर्यात के बारे में सजग रहना होगा। यह इस्पात भारत में आ सकता है। यह इस्पात भारत में आने के खतरे के बारे में सजग होना इसलिए जरूरी है क्योंकि इन देशों के साथ पहले ही हमारे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) हैं और हम डंपिंग नहीं चाहते हैं।'

कीवर्ड iron ore, steel,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक